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महिलाओं को मिले पुरुषों के समान अधिकार : वीसी

7 वर्ष पहले
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बठिंडा | सेंट्रलयूनिवर्सिटी पंजाब के सिटी कैंपस में शुक्रवार को ह्यूमन राइट्स फॉर होममेकर विषय पर एनवायरमेंट लॉ विभाग की ओर से विशेष प्रोग्राम आयोजित किया गया। इस दौरान पोस्टर प्रदर्शनी लगाई गई और विद्यार्थियों के बीच भाषण मुकाबले करवाए गए, जिसमें विद्यार्थियों एवं अध्यापकों ने अपने-अपने विचार रखे।

इस दौरान जजमेंट डीन अकादमिक डॉ. पी. रामाराव ने दी। वाइस चांसलर प्रो. आरके कोहली ने विजेता अध्यापक-विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इस मौके पर वाइस चांसलर प्रो. आरके कोहली ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों के हनन जैसे मुद्दों पर गंभीरता से चिंतन करने की जरूरत है। महिलाओं को उनके उचित अधिकार दिए जाएं, ताकि वे और अधिक सक्षम होकर समाज तथा देश के निर्माण में अपना योगदान डाल सकें।

मानवाधिकार विषय पर विद्यार्थियों की तरफ से नीरज कुमार, वीजे जतिन, अलंकार अरोड़ा, चित्रा ने महिलाओं को अधिक अधिकार देने की वकालत करते हुए कहा कि मौजूदा समय में महिलाएं सामाजिक शोषण तथा भेदभाव दोनों की शिकार हो रही हैं। इस बात में भी कोई दो राय नहीं है कि भारतीय संविधान महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले अधिक अधिकार देने की वकालत करता है, लेकिन जमीनी सच्चाई इसके विपरीत है। महिलाएं अाज भी शोषित हो रहीं हैं। जब तक महिलाओं को शिक्षित अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं किया जाता, महिलाओं पर अपराध मानवाधिकार हनन जैसी घटनाएं होती रहेंगी। अध्यापक वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हुए डॉ. राजेन्द्र कुमार, डॉ. हरीश चंद्र, डॉ. सतविंदर पाल कौर डॉ. मनीषा धीमान ने भी महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार देने की वकालत की। उन्होंने कहा कि भारतीय नारी भले ही खुद को तरक्की के रास्ते पर ले जा रही हैं, लेकिन अभी भी समाज में उनके साथ भेदभाव जारी है। पुरुष प्रधान समाज का एक बड़ा तबका उनके सीमित अधिकारों को यथोचित बनाए रखने के हक में है जोकि सही नहीं है। इस दौरान पोस्टर प्रदर्शनी में मानवी, निशा वीजे जतिन के पोस्टरों को क्रमश: पहला, दूसरा तीसरा स्थान मिला, जबकि डॉ. मोनिशा धीमान तथा छात्रा चित्रा को अच्छे वक्ता के तौर पर नवाजा गया। अंत में डॉ. पुनीत पाठक ने सभी अतिथियों, अध्यापकों स्टूडेंट्स का आभार जताया।

सेंट्रल यूनिवर्सिटी में बच्चों द्वारा तैयार पोस्टर को देखते हुए गणमान्य।