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खाने के जायके के पीछे मत भागो असल स्वाद तो प्रभु की भक्ति में
सच्ची भक्ति से ही मानव का कल्याण
पावरहाऊस रोड के शिव मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का रविवार को समापन हो गया। रविवार सुबह आयोजित हवन यज्ञ में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने मंगलकामना के लिए आहुतियां डाली और भंडारा प्रसाद ग्रहण किया।
संतमत सत्संग समिति की ओर से करवाई जा रही कथा के आखिरी प्रसंग में व्यासानंद जी महाराज ने जप-तप-सिमरन ध्यान प्रक्रिया को बेहद सरल तरीके से समझाया। स्वामी जी ने समझाया कि जप भजन करते वक्त शरीर, मस्तक गर्दन को सीधा रखें। सुखपूर्वक दोनों हाथ ऊपर-नीचे करके गोद में रखें और अंत-प्रत्यंग स्थिर रखें क्योंकि शरीर चंचल रहेगा तो मन में भी चंचलता का पुट आएगा। मूर्ति के समान स्थिर होने पर भगवान पूजे जाते हैं।
उन्होंने कहा कि घंटों बैठकर दुनिया को दिखावा करने की बजाए दस मिनट भी मन-शरीर को स्थिर रखकर जप-ध्यान कर लेना बेहद फलदायी है। आंख, मुंह बंद करके ईष्ट अथवा गुरु दीक्षा में मिले मंत्रों का जाप करें। आंख बंद करते ही अंधेरा दिखाई देगा जोकि झूठ, चोरी, नशा, छल-कपट, निंदा आदि पाप कर्म हैं।
उन्होंने कहा कि पाप के चार रूप अंधकार, मन की चंचलता, अनेक प्रकार के विघ्न एवं असाध्य रोग हैं। आंख बंद करने पर अंधेरा दिखे, तो मन में सिमरन करें।
उन्होंने कहा कि खाने के स्वाद के पीछे मत भागें, क्योंकि असल स्वाद तो प्रभु भक्ति, भजनगान में है। स्वाद रहित सात्विक भोजन करो और भूख से थोड़ा कम खाओ। रोटी का हरेक निवाला 32 बार चबाकर खाओ। उसमें से निकलने वाले रस से मन तृप्त होगा। इससे पेट की किसी प्रकार की बीमारी नहीं होगी और शरीर स्वस्थ रहेगा। स्वामी जी ने बताया कि संतों की दृष्टि में भगवत भजन ही असली धन है।
स्वामी जी ने कहा कि इहलोक और परलोक में सुख चाहिए तो सच्चे संत सदगुरु की शरण में रहकर भगवत भक्ति में लगें। कथा की समाप्ति पर समिति के चेयरमैन मनोज कुमार, उप चेयरमैन दर्शन गर्ग, सेक्रेटरी पवन गर्ग, कैशियर रतन लाल ने सभी का आभार जताया।
शिव मंदिर में प्रवचन देते हुए स्वामी व्यासानंद जी महाराज।
श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ में उपस्थित श्रद्धालु प्रवचन सुनते हुए।