- Hindi News
- बायोमैट्रिक अटेंडेंस में टीचर्स नहीं दिखा रहे दिलचस्पी, स्कीम फ्लॉप
बायोमैट्रिक अटेंडेंस में टीचर्स नहीं दिखा रहे दिलचस्पी, स्कीम फ्लॉप
सरकारीस्कूलों में अध्यापकों की स्कूलों में उपस्थिति सुनिश्चित बनाने के लिए लगाई गई बायोमैट्रिक मशीनें महज शोपीस बनकर रह गई हैं, टीचर्स रेगुलैरिटी के मकसद से लगाई मशीनें प्रयोग में नहीं लाने की वजह से स्कूलों में फिर से पुन: एडजस्टमेंट नीति का चलन बढ़ चला है जिसका सीधा प्रभाव बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
अगस्त2010 में लगाई बायोमैट्रिक मशीन : शिक्षाविभाग की ओर से अगस्त 2010 में प्रदेश के कुछ चुनिंदा स्कूलों में इलेक्ट्रानिक्स अटेंडेंस बायोमेट्रिक मशीन लगाई थी, 4 साल पहले स्कूलों में ट्रायल के तौर पर लगाई गई मशीनों में स्कूल के अध्यापक समेत सभी स्टाफ के फिंगर प्रिंट का डेटा सिक्योर किया गया जिसकी कनेक्टिविटी स्कूल मुखिया के पास रखे कंप्यूटर में थी। महीने भर की स्कूल कर्मचारियों की अटेंडेंस में उपस्थिति के दिन के हिसाब से सेलरी बननी थी और प्रत्येक स्कूल को अपनी हाजिरी आगे डीईओ आफिस को भेजी जानी थी।
जिला बठिंडा के शहरी क्षेत्र में पड़ते 20 स्कूलों में बायोमैट्रिक मशीन लगाई गई।
मैनुअलअटेंडेंस का क्रम भी जारी रहा : स्कूलोंमें बायोमैट्रिक मशीन स्थापित होने के बावजूद स्कूलों में मैनुअल अटेंडेंस का क्रम भी जारी रखा गया। इलेक्ट्रानिक्स अटेंडेंस बायोमेट्रिक मशीन को जिले के तमाम सरकारी स्कूलों में लागू करते हुए सभी अध्यापकों की हाजिरी इलेक्ट्रॉनिक अटेंडेंस बायोमैट्रिक मशीन से लगाई जानी थी लेकिन योजना पहले ही चरण में दम तोड़ गई। बायोमैट्रिक मशीनों की किसी तरह की कोई जांच-पड़ताल होने की वजह से स्कूलों में लगाई गई मशीनों की वर्किंग भी ठप हो गई।
मैनुअली अटेंडेंस ही लगाते हैं अध्यापक
अबतो बायोमैट्रिक मशीन में कोई भी अध्यापक अटेंडेंस लगाना जरूरी नहीं समझते। शिक्षा विभाग की इस योजना के ढीला पड़ने के साथ ही अध्यापकों का स्कूलों से मनमुताबिक देरी से आना पहले चले जाने की आदतों पर उतर आए। मैनुअल अटेंडेंस के चलते अनेक स्कूलों में तो प्रबंधन को विश्वास में लेकर एडजस्टमेंट नीति का चलन चल निकला है जिससे अध्यापक फरलो पर रहने लगे हैं जबकि स्कूलों में फ्लाइंग आने पर अनुपस्थित अध्यापक की ऐबसेंट अथवा लीव लगाई जाती है अथवा खाना खाली रखकर छुट्टी से पहले-पहल उसे उपस्थित दिखाया जाता है।
रिव्यू नहीं होने से सिरे नहीं चढ़ा प्रोजेक्ट
^तत्कालीनडीजीएसई कृष्ण कुमार के समय में अध्यापकों की