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बढ़ रही आबादी के मुताबिक अनाज का उत्पादन बढ़ाना समय की चुनौती

6 वर्ष पहले
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सरकारीराजिंदरा कॉलेज में जियोलॉजी विभाग की ओर से जेनेटिकली मॉडीफाइड क्रॉप्स एंड ऑर्गेनिज्म (जीएमसीओ) पर सेमिनार का आयोजन किया गया।

इस दौरान मॉनसेंटो इंडिया लिमिटेड के रीजनल कोआर्डिनेटर शैलेंदर सिंह टेरेटरी मैनेजर नितिन ढींगरा ने जीएमसीओ के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह देश की आबादी बढ़ रही है, उसी अनुपात में अनाज का उत्पादन भी बढ़ना चाहिए। इसमें जीएमसीओ का बहुत बड़ा योगदान है। जीएमसीओ फसलों के नुकसान को कम करती है। इससे फसलों पर जहां कीड़ों का असर नहीं होता, वहीं वातावरण भी दूषित होने से बचता है। जीएमसीओ की टेक्निक पर पैदा होने वाली फसलों का झाड़ भी ज्यादा रहता है और इंसानी सेहत पर इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता।

उन्होंने वैज्ञानिक तरीके भी समझाए जिसके जरिए सात साल की रिसर्च के बाद बीटी कॉटन तैयार की गई। उन्होंने बताया कि 1996 से लेकर अब तक 28 देशों में लगभग 18 लाख किसान जीएमसीओ तकनीक से खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2002 में 600 करोड़ की कीटनाशक का इस्तेमाल होता था, पर अब जीएमसीओ की फसलें पैदा होने के बाद 2008 में यह कीटनाशकों की लागत कम होकर 260 करोड़ रह गई है। दूसरे सेशन में ड्रग डी-एडिक्शन पर पेपर रीडिंग मुकाबले कराए गए जिसमें बीएससी पार्ट वन की स्टूडेंट हरप्रीत कौर ने पहला जबकि तरुणजोत कौर, अमृतपाल कौर ने क्रमश: दूसरा तीसरा स्थान हासिल किया। सेमिनार में पहुंचे अतिथियों का स्वागत प्रिंसिपल विजय कुमार गोयल ने किया, जबकि जियोलॉजी विभाग की मुखी प्रो. परमदीप कौर ने उनका आभार जताया। सेमिनार में प्रो. अमला शर्मा, प्रो. कमलजीत, प्रो. आंचल ने भी शिरकत की।

बुधवार को सरकारी राजिंदरा कॉलेज में जेनेटिकली मॉडीफाइड क्रॉप्स एंड आर्गेनिज्म पर सेमिनार करवाया गया।