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इस गर्मी में भी बिजली संकट से राहत नहीं, बिजली सिस्टम दुरुस्त नहीं हुए

6 वर्ष पहले
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इसगर्मी के सीजन में भी शहर के लोगों को ओवरलोड बिजली सिस्टम के कारण परेशानी झेलनी पड़ेगी। क्योंकि जिस कंपनी को बिजली सिस्टम सुधार योजना (एपीडीआरपी) के तरह कांट्रेक्ट किया था। उसने अभी तक काम शुरू नहीं किया और अब पावरकॉम इस काम के लिए री-टेंडरिंग करेगा।

अक्टूबर 2013 में ओवर लोड बिजली सिस्टम को दुरुस्त कर बिना रुकावट बिजली सप्लाई देने के इरादे से शहर के लिए तैयार किया गया 28 करोड़ का पावर प्रोजेक्ट वर्क आर्डर जारी होने के बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। पहले तो पावरकॉम ने इस प्रोजेक्ट के बजट में कटौती कर 47 करोड़ की बजाए 28 करोड़ कर दी थी। इसके बाद अक्टूबर 2013 से वर्क आर्डर जारी किया गया था, लेकिन कंपनी ने काम शुरू नहीं किया। पावरकॉम के आडिट के दौरान भी ऑडिट अफसरों ने कंपनी की तरफ से की गई इस देरी पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की सिफारिश की थी। इस प्रोजेक्ट के लेट होने से शहर का ओवरलोड बिजली सिस्टम निर्विघ्न बिजली सप्लाई में बाधक बन गया है।

मालवाके शहरों में बिजली सिस्टम करना था अपग्रेड : पावरकॉमने 40 शहरों के पावर सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए 2013 में प्लान तैयार किया था।इसमें मालवा के 8 शहर शामिल थे। इनमें सीएम का गृह जिला मुक्तसर, मलोट, गिदड़बाहा, बठिंडा, मानसा, रामपुरा, अबोहर, फाजिल्का में नए बिजली घर बनाने, ओवरलोड बिजली घरों फीडरों को डी लोड करना और कुछ नई लाइनें भी बिछाई जानी थी।

इसमें बठिंडा शहर में 28 करोड़, मानसा में 16.72 करोड़, रामपुरा में 9.26 करोड़, अबोहर में 16.27 करोड़, मुक्तसर में 32.13 करोड़, मलोट में 13.74 करोड़, गिदड़बाहा में 6.68 करोड़, फाजिल्का में 9.65 करोड़ बिजली सिस्टम अपग्रेड करने पर खर्च होने थे। इन आठों शहरों का काम टू जैड कंपनी को सौंपा गया था।

सप्लाई में दिक्कत नहीं आएगी

^भलेही ये योजना लागू नहीं हो पाई लेकिन शहरवासियों को बिजली सप्लाई में हम कोई दिक्कत नहीं आने दे रहे। हम लगातार काम कर रहे हैं। हरदीपसिंह सिद्धू, एक्सईएन,पावरकॉम

री-टेडरिंग की जाएगी

^अबइसकी री-टेंडरिंग की जाएगी। कंपनी द्वारा काम शुरू नहीं किया गया। इसके कारण अब री-एलोकेशन की जाएगी। -इंजी.ज्ञानचंद सिंगला, एसई,पावरकॉम

24 घंटे बिजली देने की हुई थी घोषणा

शहरमें मौजूदा समय में पावरकॉम के 1.05 लाख उपभोक्ता हैं। सरकार ने 2011 में बठिंडा को 24 घंटे बिजली सुविधा देने की घोषणा की थी। मगर पावरकॉम के उपकरणों की हालत खराब होने से शहर के अधिकांश हिस्सों में बिजली लोड बढऩे से अचानक बिजली ट्रिप होने की समस्या पैदा होती रहती है।

सर्वे से आगे नहीं बढ़ पाई कंपनी

जिसकंपनी को कांट्रेक्ट दिया गया था उसने कांट्रेक्ट मिलने के बाद सर्वे शुरु कर दिया लेकिन इसके बाद कुछ नहीं किया। इस योजना से ओवरलोड चल रहे हैं शहर के ट्रांसफार्मरों का लोड कम होना था। इसका सीधा फायदा 1.05 लाख उपभोक्ताओं को मिलना था। विभाग ने इस योजना की प्लानिंग 2009 में की थी लेकिन आज तक इसको लागू नहीं किया जा सका।

ओवरलोड चल रहे हैं शहर के ट्रांसफॉर्मर

पिछलेपांच साल से शहर के ट्रांसफार्मर ओवरलोड में चल रहे हैं। हालांकि समय-समय पर पावरकॉम अपनी क्षमता अनुसार इन्हें डीलोड करता है, मगर आए दिन बढ़ते बिजली कनेक्शनों की संख्या से ओवरलोड ट्रांसफार्मरों का आंकड़ा घटने का नाम नहीं ले रहा।

8 शहरों पर खर्च होने थे 132.45 करोड़

लोकसभाचुनाव से पहले जब सीएम परकाश सिंह बादल ने बठिंडा में संगत दर्शन किए तो उन्होंने लोगों की पावर सिस्टम के प्रति शिकायतों को देखते हुए पावरकॉम से जवाब मांगा था। इस दौरान अफसरों के फीडबैक पर सीएम ने आवासन दिया था कि बहुत जल्द पावर सिस्टम अपग्रेड होने जा रहा है। इसके बाद ओवरलोडिंग की समस्या खत्म हो जाएगी।

>इस योजना के तहत एमईएस 66 केवी ग्रिड से लेकर गोल डिग्गी 66 केवी ग्रिड तक 4.25 किलोमीटर लंबी मुख्य केबल डाली जानी थी।

> इसके अलावा इन ग्रिडों से जुड़े 6.3 एमबी के ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाकर 12 एमवी 12.50 एमबी के ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाकर 20 एमबी की जानी थी।

>शहर में 100 केवीए के 74 ट्रांसफार्मर नए लगाए जाने थे।

>100 से 200 केवीए के 17 ट्रांसफार्मरों को अपग्रेड किया जाना था।

>63 केवीए के 31 ट्रांसफार्मरों को 100 केवीए 25 केवीए के 5 ट्रांसफार्मरों को 100 केवीए में तब्दील किया जाना था।

>294 ट्रांसफार्मरों से जुड़ी 101 किलोमीटर लंबी एलटी लाइन के कंडक्टरों की क्षमता बढ़ाई जानी थी।

>शहर में मीटरों को घरों से बाहर निकालने के लिए 1429 पिलर बॉक्स लगाने की योजना थी।

>बिजली तारों को सपोर्ट देने के लिए 550 नए बिजली पोल लगाए जाने थे।

>1250 ट्रांसफार्मरों की अर्थिंग की जानी थी।