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बेरोजगारी दूर करने में स्मॉल इंडस्ट्रीज सहायक

6 वर्ष पहले
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लघुउद्योगों के विकास में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में क्लस्टर विकास दृष्टिकोण काफी सफल रहा है। अपने उद्योगों को कंपीटिटिव बनाने के लिए इंडस्ट्री के क्लस्टर बनाकर एक्सपर्ट ट्रेनिंग ली जाए। यह आह्वान नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल एनपीसी आरपीएम चंडीगढ़ के डिप्टी डायरेक्टर एसपी सिंह ने किया। वे गणपति एंकलेव के ट्यूलिप क्लब में आयोजित डिस्ट्रिक्ट इंडस्ट्री सेंटर की बैठक में उपस्थित जिले के उद्योगपतियों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर एडीसी डेवलपमेंट वीरेंदर शर्मा ने उद्योगों को प्रोत्साहन देने में प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था में मिनिस्ट्री ऑफ माइक्रो स्मॉल मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) का महत्वपूर्ण रोल है। देश की दो प्रमुख समस्याओं बेरोजगारी और गरीबी को दूर करने में एमएसएमई अहम रोल अदा करता है। कम पूंजी वाली अर्थव्यवस्था में बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्यों को पूरा करता है। जिले की इंडस्ट्री को विकसित करके कंपीटिटिव बनाया जाना चाहिए। इसके लिए एमएसएमई की लीन मैन्युफैक्चरिंग कंपीटिटिव स्कीम का लाभ लेते हुए इंडस्ट्री के 10 क्लस्टर बनाए जाएं। इन कलस्टरों को डेढ़ साल की अवधि में अलग-अलग उद्योगों के एक्सपर्ट कंसल्टेंट इंडस्ट्री में जाकर ट्रेनिंग देंगे और इस प्रोजेक्ट पर आने वाले 18 से 36 लाख रुपए के खर्च की 80 फीसदी सब्सिडी सरकार की ओर से होगी जबकि 20 फीसद खर्च इंडस्ट्री को आपस में बांटना होगा।

अवेयरनेस प्रोग्राम में डीआईसी के जनरल मैनेजर चमन लाल, चेंबर आफ कॉमर्स के प्रेजीडेंट रमन वाट्स, मोहनजीत सिंह पुरी, मुकेश जिंदल, सतीश अग्रवाल, ज्ञान प्रकाश गर्ग, राकेश सिंगला, विजय सिंगला उपस्थित थे।

डिस्ट्रिक्ट इंडस्ट्रीज सेंटर की बैठक में उपस्थित एडीसी वीरेंदर शर्मा, डीआईसी के जीएम चमन लाल, बठिंडा चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रेजीडेंट रमन वाट्स।