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जिन फोन नंबरों का रिकॉर्ड चाहिए था, जल गए : पुलिस
ज्योतिके कत्ल की जांच में पंचकूला पुलिस और फिर एसआईटी ने घोर लापरवाही बरती। आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई। जो चार्जशीट कोर्ट में पेश की गई उसमें कई लूपहोल्स थे। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ज्योति और आरोपियों के कॉल डिटेल्स और टावर लोकेशन साबित ही नहीं कर पाई। दरअसल इसमें बड़ा खेल खेला गया। पुलिस ने कहा कि कॉल डिटेल के रिकॉर्ड कंपनी में लगी आग में जल गए।
ज्योति के कत्ल से पहले और कत्ल की रात भी उसके मोबाइल पर बार-बार एक नंबर (9872550737) से फोन आए और गए। पुलिस यही पता नहीं लगा सकी कि यह फोन किसका था और कौन चला रहा था। असलियत में मोबाइल फोन नंबर बठिंडा की तहसील तलवंडी साबो के बहादुर सिंह के नाम पर रजिस्टर है। यह नंबर बहादुर सिंह की जाली आईडी पर खरीदा गया था।
चार्जशीट में पंचकूला पुलिस ने साइबर सेल के कम्प्यूटर ऑपरेटर गुरपिंद्र सिंह के बयान दर्ज किए हैं। इसमें कहा गया कि यह नंबर और एयरटेल कंपनी के कई अन्य नंबरों की डिटेल चाहिए। लेकिन यह डिटेल्स नहीं मिलीं, क्योंकि पुलिस ने कहा कि कंपनी के मुताबिक आग में उनका रिकॉर्ड जल गया है। गुरपिंद्र ने कोर्ट में भी यही बयान दिए। हालांकि चार्जशीट में इसका जिक्र नहीं है कि कंपनी की तरफ से आग लगने का कोई जवाब आया था।
मोबाइल कॉल डिटेल का रिकॉर्ड किसी फाइल में नहीं होता, जो जल जाए तो रिकवर नहीं हो सकता। कम्प्यूटर जलने पर भी रिकॉर्ड डिस्ट्रॉय नहीं होता, उसे दोबारा निकाला जा सकता है।