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- 2000 से 2008 तक मालवा में 4800 िकसानों ने खुदकुशी की
2000 से 2008 तक मालवा में 4800 िकसानों ने खुदकुशी की
बठिंडा, मानसा में िपछले तीन िदनों में जान देने वाले िकसान नाथ िसंह, रूप िसंह।
}कर्ज के चलते अप्रैल और मई में ही 13 िकसानों ने खुदकुशी कर ली। इनमें मानसा के गांव शेरखान वाला के किसान शमिंदर सिंह, मोगा के गांव अजीतवाल का किसान जसविंदर सिंह, बरनाला के अशपाल कलां गांव का किसान गुरसेवक सिंह। बठिंडा के गांव गुरुसर जलाल का किसान गुरनाम सिंह, संगरूर के गांव मटरा का किसान भूिपंदर सिंह, खेकरण गांव का सतपाल सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल के गांव का बलविदंर सिंह। बठिंडा के भगताभाईका गांव का सुखदेव सिंह, संगरूर के गांव लखमीर वाला का हरिंदर सिंह, मोगा का किसान मुखत्यार सिंह। मानसा के गांव हसनपुरा के दो किसान भाईयों जुगराज और जगतार िसंह, बठिंडा के गांव फूल का किसान टहल सिंह। बठिंडा के गांव चक्क फतेह सिंह वाला का किसान जगमीत सिंह शामिल हैं।
अप्रैल और मई में ही 13 किसान चल बसे
खेत मजदूर संघ के प्रदेश महासचिव लक्ष्मण सेवेवाल का कहना है, पंजाब में किसानों खेत मजदूरों की खुदकुशियां तब तक बंद नहीं होंगी जब तक किसानों का कर्ज काफ और कृषि लागत कम नहीं की जाती। फसलों का दाम बढ़ाना कोई हल नहीं है। सरकार ने कैबिनेट में 2009 में कर्ज माफी कानून बनाने का फैसला लिया था, मगर यह आगे नहीं बढ़ा। इसके बाद फरवरी 2014 में मीटिंग में 6 माह में सीएम ने इसे लागू करने की बात की मगर अभी भी कुछ नहीं हुआ।
नरिंद्र शर्मा, बठिंडा
वर्ष2000 से 2008 तक मालवा भर में 4800 किसानों, खेत मजदूरों ने जान दी। बठिंडा और संगरूर जिले में ही इनकी संख्या 2900 के करीब है। कारण कुदरती मार से बर्बाद फसल और कैंसर के इलाज में कर्जाई होना। ये आंकड़े पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के 2011 में करवाए सर्वे में सामने आए हैं। यही नहीं अप्रैल और मई 2 महीनों में ही 13 किसानों ने खुदकुशी कर ली।
अभी भी ये िसलसिला थम नहीं रहा है। िपछले तीन िदनों में बठिंडा और मानसा में दो किसानों ने खुदकुशी कर ली। भास्कर टीम ने इन दोनों िकसानों के घर जाकर हाल जाना। वीरवार को फंदा लगाने वाले गांव घुम्मन कलां के किसान नाथ सिंह के कर्ज में डूबने की शुरुआत 1991 में हुई थी। प|ी शांति कौर को कैंसर हुआ था। इलाज में कर्ज तो चढ़ा ही। 5 एकड़ जमीन में से 1 एकड़ बिक गई। प|ी फिर भी नहीं बची। कर्ज चुकाने के लिए नाथ सिंह ने जमींदारों से 1 लाख रुपये उधा