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टीचर्स होम में शायर गुरप्रीत हुए दर्शकों से रूबरू, लेखकों दर्शकों से सांझे किए अपनी जिंदगी के तजुर्बे

7 वर्ष पहले
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शायर गुरप्रीत ने दर्शकों से रूबरू होकर अपनी जिंदगी के तजुर्बे सांझे किए।

दर्शकों ने शायर गुरप्रीत से उनकी जिंदगी सिरजना के बारे में जाना।

सिरजना के लिए किसी विशेष स्थान या समय की जरूरत नहीं



भास्करन्यूज| बठिंडा

पंजाबीसाहित्य सभा द्वारा टीचर्स होम में एक साहित्यिक समागम आयोजित किया गया। समागम के दौरान शायर गुरप्रीत दर्शकों के साथ रूबरू हुए। इस मौके पर शायर गुरप्रीत ने अपने जीवन अपनी सिरजन प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सिरजना के लिए कोई विशेष समय या स्थान की जरूरत नहीं होती। आप कहीं भी किसी भी हालत में हो सकते हैं। इसलिए सिरजना किसी एक जगह या विशेष समय का मोहताज नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं मिथ कर नहीं लिखता, शब्द ही मुझे लिखने के लिए कहते हैं। समागम में पंजाबी लेखकों कलाप्रेमियों ने गुरप्रीत से उनकी जिंदगी रचनाओं से संबंधित कई सवाल पूछे। इस पर गुरप्रीत ने अपनी जिंदगी के पन्नों को दर्शकों के सामने खोल कर रख दिया। उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी का कोई भी ऐसा सीक्रेट नहीं है जो उन्होंने अपनी रचनाओं में बयां किया हो। उन्होंने अपने बिछुड़ चुके साथी देवनीत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर आज वो जिंदा होते तो मुझे फिर कहते -दखाणा अज्ज फेर नवीं शर्ट लै लई इस मौके पर हाजिर कवियों ने भी अपनी रचनाएं पेश की। प्रधानगी मंडल में जीत सिंह जोशी, रनजीत गौरव जसपाल मानखेड़ा शामिल थे। इस अवसर पर कामरेड जरनैल सिंह, शायर सुरिंद्रप्रीत घनियां, दमजीत दर्शन, सुखदर्शन गर्ग, सेवक सिंह शमीरिया, मंगत कुलजिंद, इंद्र मोहन शर्मा, रविंदर संधू, सुरेश हंस, गुरदेव खोखर, डॉ.अजीतपाल सिंह भी थे।