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मुल्तानिया पुल की हालत खस्ता रिपेयर को चाहिए डेढ़ करोड़ रुपए

7 वर्ष पहले
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बठिंडा | लाइन पार इलाके की डेढ़ लाख आबादी को शहर से जोड़ने वाला मुल्तानिया रोड खतरे में है। मगर लोक निर्माण विभाग ने इसे रिपेयर करवाने की बजाए इस पर सावधान का चेतावनी बोर्ड लगाकर पल्ला झाड़ लिया। ऐसे में खस्ताहाल रेलिंग और फुटपाथ के कारण यहां से रोजाना गुजरने वाले लोग किसी भी समय बड़े हादसे का शिकार हो सकते हैं। अफसरों का कहना है कि इस ब्रिज को चूहों ने कुतर कर खस्ताहाल कर दिया, असल में इस ओवरब्रिज का रखरखाव ही नहीं किया गया, जिससे मात्र 22 साल पहले बना यह ओवरब्रिज आज खस्ताहाल हो चुका है। मगर सवाल यह उठता है कि अगर कोई हादसा होता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा ? लेकिन इसकी जिम्मेवारी लेने वाला भी कोई नहीं।
पुलसे गुजरना है खतरनाक : 1992में उस समय के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की तरफ से बनवाया गया मुल्तानिया रोड ओवरब्रिज आज 22 साल में ही खस्ताहाल हो गया। 1400 मीटर लंबे इस पुल के फुटपाथ पर जगह-जगह खड्डे पढ़ चुके हैं। और इसके टुकड़े टूटकर रेलवे लाइन पर गिर रहे हैं। पुल की रेलिंग जगह जगह से टूट चुकी है और उस पर दरारें हैं जो किसी भी समय हादसे का कारण बन सकती है। लोक निर्माण विभाग ने यहां पर सावधानी का बोर्ड टांग दिया है। पुल के अंदर भरी मिट्टी में पीपल के पेड़ उग आए हैं, जिससे पुल की हालत और खराब हो रही है। पुल के फुटपाथ पर बने होल में बारिश के समय पानी जाने से मिट्टी बैठने से पुल की दीवारों के लिए भी खतरा पैदा हो गया है। चूहों ने यहां बिल बना रखे हैं जो पुल की नींव को कमजोर कर चुक हैं।

सीएमके रूट के लिए करवाई रिपेयर, जनता की सुरक्षा के लिए डेढ़ करोड़ नहीं : 2012में भी एक बार लोक निर्माण विभाग ने मुल्तानिया ओवरब्रिज पर सावधानी का बोर्ड लगाकर इसे खस्ताहाल करार दिया था। इस दौरान बादल रोड ओवरब्रिज निर्माण पूरा होने से सीएम परकाश सिंह बादल के गांव बादल को जाने के लिए यही एकमात्र रास्ता था। सीएम, डिप्टी सीएम और सांसद कर काफिला यहां से कई बार गुजरता था। तब सीएम का रूट होने से इस ओवरब्रिज की रिपेयर के लिए फंड जारी हुआ था और रिपेयर भी हो गई थी।
मगर अब यह पुल फिर खस्ताहाल हो चुका है, मगर अब बादलों को इस पुल की जरूरत नहीं, क्योंकि बादल रोड ओवरब्रिज का काम पूरा होने से यह उनका रूट नहीं रहा। यही कारण है कि विभाग के इस पुल की रिपेयर के लिए डेढ़ करोड़ रुपये का फंड मांगने के बावजूद आज तक फंड नहीं मिल पाया।
मुल्तानिया पुल की हालत खस्ता रिपेयर को चाहिए डेढ़ करोड़ रुपए ।

शहर से गांवों को जोड़ता है पुल : यहपुल कई मार्गों, कई कालोनियों, कई बस्तियों और पूरे शहर से जुड़ा है। जिनमें गुरु नानक पुरा, लाल सिंह बस्ती, सिरकी बाजार, पुराना थाना रोड, बीड़ तालाब रोड, गांव बीड़ बहमन, झुंबा, घुद्दा बादल आदि हैं। इस पुल के निर्माण से पहले रेलवे फाटकों पर अटके रहने वाले लोगों की समय पैसे की बरबादी होती थी। शहर दो भागों में बंटा हुआ था।

पुलके आसपास के इलाके भी दहशत में : मुल्तानिया पुल की हालत खस्ता होने से इसके आसपास बसे इलाकों के लोग भी दहशत में हैं। पुल के पास रहने वाले करतार, अमृतपाल अवतार सिंह ने बताया कि वह अपने बच्चों के पुल के आसपास खेलने के लिए भी नहीं जाने देते, ताकि वह हादसे का शिकार हो जाएं। उन्होंने बताया कि वह कई बार पुल की हालत सुधारने के लिए लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन से मिल चुके हैं। मगर अभी तक विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
लोक निर्माण विभाग ने पुल पर लगाया बोर्ड, लिखा-रेलिंग कमजोर है, सहारा लेकर खड़े हों
''मुल्तानियां पुल की हालत खराब होने का कारण चूहे हैं, जो आस पास की बस्तियों से रहे हैं। पुल की रेनोवेशन के विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को लिख कर दिया जा चुका है, जिसमें डेढ़ करोड़ रुपए फंड मांगा गया है। जैसे ही पैसा सैंक्शन होगा उसी वक्त पुल की रिपेयर शुरु कर दी जाएगी। इसकी रिपेयर के लिए तीन महीने का समय लगेगा।'' नीरज भंडारी, एक्सईएन,लोक निर्माण विभाग।