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\"अहंकारी भगवान को पसंद नहीं\'

7 वर्ष पहले
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मानवशरीर 18 इंद्रियों से बना है। इनमें 5 कर्म इंद्रियां, 5 प्राण इंद्रियां, 5 ज्ञान इंद्रियों के अलावा मन, बुद्धि और अहंकार है। हमें सिर्फ मन को ठीक करना है। अगर मन में अहंकार होगा तो मन में भगवान बैठ ही नहीं सकते। मन वश में होगा, तो इसमें अहंकार प्रवेश नहीं कर सकता। इन शब्दों का प्रकटावा साध्वी भुवनेश्वरी देवी ने हरपाल नगर के गीता भवन में चल रहे प्रवचनों के दौरान किया। उन्होंने कहा कि भगवान को पाने के लिए सब से पहले तामसी भोजन छोड़ना होगा, क्योंकि मनुष्य जैसा अन्न खाता है, उसके विचार भी वैसे ही पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि साधना में मन का विशेष स्थान है। भगवान कहते हैं कि यदि मुझ से प्रेम करना है तो सब से पहले दीनता का भाव लाना होगा। भगवान को दीनता प्रिय है। भगवान किसी जीव का अहंकार तो देख ही नहीं सकते। इससे पहले समागम की शुरूआत गुरदास गर्ग, तरसेम, संदीप परमार, प्रवीण रोमी, चरणजीत जग्गी, सोनू ग्रोवर, भूषण कुमार द्वारा ज्योति प्रज्जवलित करके की गई।

साध्वी भुवनेश्वरी देवी जी गीता भवन में प्रवचन देती हुई।