\"परमात्मा इंसान के भीतर मौजूद\'
बठिंडा | इससंसार में पैदा होने वाले हर जीव का एक दिन जाना तय है। पर जिस ईश्वर ने जीव को इंसान का जामा दिया। उसी ईश्वर को भूलकर इंसान इस संसार में आने के बाद अपने परिवार, समाज और इस नश्वर संसार को अपना बना बैठा और सब कुछ देने वाले ईश्वर को भूल बैठा है। इन विचारों का प्रकटावा ऋषि दिनेश विश्वास जी ने विश्वास आश्रम बठिंडा में आयोजित सत्संग के दौरान प्रवचन करते हुए किया। उन्होंने कहा कि इंसान की यही भूल उसके दुखों का मूल कारण है, क्योंकि इंसान की आत्मा सदा उस ईश्वर की ही कामना करती है। इंसान उस परमात्मा को इस संसार में ढूंढता है। परंतु वह परमात्मा इस संसार में नहीं, बल्कि इंसान के भीतर ही है। जब भी मिलेगा, अपने अंदर ही मिलेगा। जब परमात्मा का दीदार अपने भीतर से होगा, तभी वह परमात्मा का दीदार संसार के कण कण में कर सकेगा। साईं बुल्लेशाह जी ने भी कहा था कि साईं ता साडे तो वख नहीं पर साडी देखन वाली अॅख नहीं अर्थात् पूर्ण सदगुरू की कृपा से इंसान को अपने भीतर से ही दीदार हो जाता है।