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ओपीडी का सॉफ्टवेयर एक साल से खराब, मैन्युअल कट रही पर्ची
कंप्यूटरसॉफ्टवेयर में आई खराबी के चलते पिछले करीब एक साल से सिविल अस्पताल की ओपीडी में कंप्यूटराइज्ड की बजाय मैन्युअली पर्ची काटी जा रही है। इससे जहां सेहत विभाग के कर्मियों का समय बर्बाद हो रहा है, वहीं सिविल अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। वहीं सिविल अस्पताल के एसएमओ का कहना है कि इस संबंध में विभाग को सूचित किया जा चुका है।
रिकाॅर्डमेनटेन करने में हो रही परेशानी
सिविलअस्पताल की ओपीडी में पहले कंप्यूटर के माध्यम से पर्ची काटकर लोगों को दी जाती थी। इस वजह से ओपीडी का सारा रिकॉर्ड विभाग के पास रहता था। जरूरत पड़ने पर रिकॉर्ड को ऑनलाइन भी भेजा जाता था।
इसके लिए बाकायदा विभाग ने एक विशेष सॉफ्टवेयर भी बना रखा था। लेकिन सॉफ्टवेयर खराब रहने के कारण करीब एक साल से ओपीडी में लोगों को कंप्यूटराइज्ड पर्ची नहीं मिल रही है।
कंप्यूटर से पर्ची काटने के कारण पहले कर्मियों के समय की भी काफी बचत होती थी। लेकिन अब सारा काम मैन्युअली ही हो रहा है। ऐसे में रिकॉर्ड रखने में भी परेशानी हो रही है। मैन्युअल पर्ची बनाने में पहले के मुकाबले समय भी अधिक ले रहा है। जिसके चलते मरीजों को अधिक समय ओपीडी लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है।
^मैं सुबह करीब आठ बजे गांव पथराला से सिविल अस्पताल के लिए चला था। जब अस्पताल पहुंचा, तो देखा कि यहां पर भारी भीड़ है। पर्ची कटवाने के लिए घंटों तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा। इसके बाद इलाज करवाने और दवाई के लिए भी लाइन में लगना पड़ा। इस तरह सारा दिन आज मेरा अस्पताल में ही कट गया। जगदेवसिंह वासी पथराला,बठिंडा।
^मैं सुबह से ही अस्पताल में हूं। पर्ची कटवाने के लिए सुबह से ही लंबी लाइन लगी हुई थी। लाइन में लगने के काफी समय बाद मेरी बारी आई, तब जाकर पर्ची कट सकी। आज का पूरा दिन मेरा अस्पताल में ही कट गया। मुझे मेरे परिवार को काफी परेशानी हुई। कल फिर से अस्पताल में इलाज के लिए आना होगा। बीनाकुमारी वासी पटेल नगर,बठिंडा।
^करीब एक घंटे तक लाइन में लगने के बाद मेरी पर्ची कटी है। इसके बाद जब डॉक्टर के पास गया, तो वहां पर भी आधे घंटे का समय लग गया। डॉक्टर ने टेस्ट करवाने को लिखा है। टेस्ट की फीस जमा करवाने के लिए फिर से लाइन में खड़ा हूं। इस तरह आज करीब तीन घंटे मेरा समय अस्पताल में बीता है। गुरमीतसिंह वासी बठिंडा।