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सरकार के ऐलान से जिला परिषद असमंजस में

7 वर्ष पहले
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पंजाबसरकार द्वारा जिला परिषद के अधीन चल रहे सरकारी स्कूलों को शिक्षा विभाग में शामिल करने का एेलान किए जाने को लेकर जिला परिषद के अधिकारी असमंजस में हैं। अभी तक जिला परिषद के अधिकारियों को ये भी पता नहीं चल पाया है कि स्कूलों का इंफ्रॉस्ट्रक्चर उनका रहेगा या फिर ये भी शिक्षा विभाग को ट्रांसफर हो जाएगा। इस कारण स्कूलों को डेवलप करने के कार्यों पर फिलहाल विराम लग गया है। जिला परिषद के पास जिले में कुल 123 स्कूल हैं। सरकार के फैसले के बाद ही इनको आगे डेवलप किया जा सकेगा। जिला परिषद द्वारा अपने स्कूलों को डेवलप करने के लिए कई प्रकार की योजनाएं बनाई गई थी और कई कंपनियों के साथ एमओयू साइन किए गए थे। इनमें से एक महत्त्वपूर्ण योजना थी कि जिला परिषद द्वारा जिले के प्रत्येक ब्लॉक में से एक-एक स्कूल को तकनीकी तौर पर विकसित करने की।

इसके तहत स्कूलों में आधुनिक इंफ्रॉस्ट्रक्चर मुहैया कराना और इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज शुरू करना प्रमुख था। तलवंडी ब्लॉक में नंगला गांव को इस स्कीम में डाला गया था। इस स्कूल में स्मार्ट क्लासेज लगाने का प्रबंध किया जाना था। जिला परिषद द्वारा इसके तहत स्कूलों को डेवलप करने की योजना ही बनाई थी कि उधर सरकार ने ये फैसला सुना दिया। इस कारण फिलहाल इस काम को रोक दिया गया है। इन स्कूलों के इंफ्रॉस्ट्रक्चर को भी शिक्षा विभाग को सौंपे जाने की हालत में डेवलपमेंट के ये काम अधर में लटक सकते हैं, क्योंकि कंपनी का एमओयू जिला परिषद के साथ हुआ है, शिक्षा विभाग के साथ नहीं। ऐसी स्थिति में कंपनी को नए सिरे से शिक्षा विभाग के साथ एमओयू पर साइन करने होंगे। जिसकी संभावनाएं कम ही दिख रही है। अगर सिर्फ स्टाफ को ही शिफ्ट किया जाता है, तो भी स्कूलों को डेवलप किया जा सकेगा।

अभी तक फैसला क्लियर नहीं हुआ

^हमेंअभी तक ये बात क्लियर नहीं है कि स्टाफ के साथ साथ स्कूलों काइंफ्रॉस्ट्रक्चर भी शिक्षा विभाग में शिफ्ट होगा या सिर्फ स्टाफ ही।इस कारण हमारी योजनाएं लटक गई हैं। सोनालीगिरि, एडीसी(विकास)बठिंडा