वजूद बचाने में नाकाम ई-लैब और एजुसेट
सरकारीस्कूलों में लाखों की लागत से स्थापित लैब एवं एजुसेट अपना वजूद बचाने में नाकाम हो रहे हैं, विद्यार्थियों को इन कंप्यूटर लैब्स का रत्ती भर भी लाभ नहीं मिल पा रहा। परोपर मेंटेनेंस के झंझावात से बचने को आईसीटी की कंप्यूटर लैब्स को ई-लैब में मर्ज कर दिया गया है जबकि एजुसेट लैब्स भी टर्मिनल से सिग्नल कमजोर रहने की वजह से बेकार हो गई हैं।
शिक्षा विभाग की ओर से वर्ष 2014 में सरकारी स्कूलों में एजुकेशन थ्रू सेटेलाइट (एजुसेट) शिक्षा पद्धति में इजाफा करते हुए विभिन्न सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में \\\'एजुसेट लैब\\\' स्थापित की। हर लैब में चार सर्वर, हेडफोन सहित 24 एलईडी, कंप्यूटिंग डिवाइस, पांच केवी का यूपीएस, स्टेबलाइजर के अलावा 25 कुर्सियां टू सीटर तेरह टेबल लगाए गए। स्कूलों में लगे एसआईटी (सेटेलाइट इंट्रैक्शन टर्मिनल) एवं आरओटी (रिसीव ओनली टर्मिनल) के जरिए मेडिकल नान मेडिकल समेत कामर्स आर्ट्स के 8वीं से 12वीं के विद्यार्थी के पढ़ाई का प्रावधान किया गया। \\\'एजुसेट लैब\\\' से विद्यार्थी स्मार्ट क्लास पैटर्न पर लाइव लेक्चर की रिकार्डिड सीडीज के अलावा सिलेबस बुक्स का सारा मेटीरियल भी सीडीज इस लैब पर उपलब्ध कराया गया ताकि विद्यार्थी किसी भी वक्त इस लैब से स्टडी कर सके जबकि किसी कारणवश लेक्चर अटेंड नहीं कर पाने वाले विद्यार्थियों को होना था।
जिले के 32 स्कूल-कॉलेजों में 32 एसआईटी स्थापित की गई हैं जिनमें 25 तो पिछले 6-7 महीने से इस्तेमाल में नहीं पा रही हैं क्योंकि चंडीगढ़ से टर्मिनल से कुछ भी रिसीविंग नहीं हो पा रहा। इनमें चार कॉलेज, डाइट, इन सर्विस ट्रेनिंग सेंटर नंदगढ़ का स्कूल भी शामिल है। इसके अलावा जिले के हाई सेकेंडरी के 273 स्कूलों में आरओटी स्थापित हैं लेकिन कुछेक स्कूलों में चोरी होने की वजह से यहां की पढ़ाई ठप है।
हाई सेकंडरी स्कूलों में छठी से बारहवीं के बच्चों को स्मार्ट क्लास की भांति स्थापित ई-लैब्स को भी स्कूलों की आईसीटी लैब को अपग्रेड करने की आड़ में मर्ज कर दिया गया है। पहले से सरकारी स्कूलों की आईसीटी लैब के 12 कंप्यूटरों में फेज वन टू में आए रोज कोई कोई गड़बड़ी से निपटने में एनुअल मेंटीनेंस का जिम्मा संभाल नहीं कंपनी के हाथ खड़े कर देने के बाद स्कूलों में एलईडी लगाकर ई-लैब को ही कंप्यूटर लैब में मर्ज कर दिया, अब कंप्यूटर एजुकेशन के बाद खाली वक्त मिलने पर ह