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‘बिजली रेट बढ़े तो प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ने से हिलेगी इंडस्ट्री’

6 वर्ष पहले
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पंजाबप्रदेश व्यापार मंडल के प्रधान अमृत लाल जैन, महासचिव सुनील मेहरा और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्यारा लाल सेठ ने कहा कि राज्य में दोबारा से बिजली दरें बढ़ाई गई तो प्रोडक्शन कोस्ट बढ़ने से इंडस्ट्री को भारी नुकसान होगा।

पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (पीएसईआरसी) की चेयरपर्सन ने 5 फरवरी 2015 को लुधियाना में 1 अप्रैल 2015 से बिजली दरें बढ़ाने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में पंजाब के मुकाबले बिजली सस्ती और रेगुलर है। इसके अलावा वैट कम, एक्साइज ड्यूटी माफ होने के साथ ही लेबर भी सस्ती है। ऐसे में बिजली दरों में बढ़ोतरी राज्य की इंडस्ट्री में मंदी लाने का काम करेगी। मंडल पदाधिकारियों ने कहा कि यदि पंजाब सरकार एग्रीकल्चर सेक्टर को दी जाने वाली 5 हजार करोड़ की सबसिडी घटाकर 2500 करोड़ कर दे तो सभी घाटे पूरे हो सकते हैं।

कारोबारियों ने कहा कि संगरूर सर्किल में 5455 बिजली चोरी के केस सामने आए हैं, ऐसे में विभाग क्या कर रहा है? 1 जनवरी 2015 से रेगुलेटरी कमीशन ने 5 पैसे किलोवाट हॉर्स पावर (केडब्ल्यूए) घरेलू इंडस्ट्री पर फ्यूल कोस्ट एडजस्टमेंट (एफसीए) सरचार्ज लगाकर 76 करोड़ वसूले हैं। पावरकाम थर्मल प्लांट्स लहरा मुहब्बत, रोपड़, बठिंडा ने मिलकर वर्ष 2009-10 में 10055 मेगावाट, 2010-11 में 9718, 2011-12 में 9564, 2012-13 में 9167, 2013-14 में 8005 और 2014-15 में 15,400 मेगावॉट की जगह अब तक 10,500 मेगावाट ही उत्पादन हुआ है। प्राइवेट थर्मल प्लांट वालों से 2.36 से लेकर 2.69 रुपए प्रति यूनिट पर बिजली खरीदने का समझौता था लेकिन 5.13 रुपए प्रति यूनिट दाम दिए गए। ऐसे में घाटे के लिए पावरकाम खुद जिम्मेदार है, इसका बोझ इंडस्ट्री और अन्य खपतकारों पर नहीं डाला जाना चाहिए। रेगुलेटरी कमीशन को अपनी कार्यशैली पर व्हाइट पेपर छापना चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं के सामने सच्चाई सके। मंडल पदाधिकारी एसके वधवा, रंजन अग्रवाल, सुरेंद्र दुग्गल, राकेश ठुकराल, राधे श्याम आहूजा, महेंद्र अग्रवाल, एलआर सोढी सहित अन्य ने भी बिजली दरें बढ़ाए जाने की मांग की है।

किसानों की सब्सिडी घटाओ तो घाटे पूरे हो जाएंगे