सतगुरु ही दिखाते हैं मुक्ति का रास्ता
भास्करन्यूज | बठिंडा
दिव्यज्योति जागृति संस्थान की ओर से अजीत रोड स्थित आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी रीतू जी ने श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन एक नैया के समान है, जो कि संसार रूपी भवसागर में तैर रही है। नाव और उसके मुसाफिर तब तक भवसागर में भटकते रहेंगे, जब तक उनके पास कुशल माझी हो। अगर उन्हें कुशल माझी नहीं मिला, तो उस नाव मुसाफिरों की क्या हालत होगी। वह नाव लहरों के थपेड़ों से अपनी हस्ती को खो देगी। यह तो एक सांसारिक दृष्टांत है, पर यह दृष्टांत मनुष्य के जीवन से बहुत अधिक मेल खाता है। वह भी अपनी जीवन नैया में सवार हो संसार रूपी सागर पर तैरता है। बिल्कुल उस नाव की तरह उसे भी कुशल माझी नहीं मिला, तो विपरीत परिस्थिति रूपी लहरें उसकी हस्ती को डूबो देंगी। अगर मनुष्य को अपनी हस्ती बचाना है और वह सुख-शांति चाहता है, तो उसे सतगुरु रूपी माझी की खोज करनी होगी। लेकिन सतगुरु रूपी माझी सौभाग्य से मिलते हैं। इसलिए ऐसे माझी की खोज करनी चाहिए जिसे सागर के दूसरे किनारे का भी ज्ञान हो, उसकी गहराई को मापा हो। इस अवसर पर साध्वी बहनों ने मधुर भजनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया।
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आयोजित समागम में प्रवचन सुनते हुए श्रद्धालु।
साध्वी रीतू जी प्रवचन देती हुई।