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बेंगलुरू के बाद बठिंडा में बटुक भैरव मंदिर
शहरसे 6 किमी दूर शांत और खेत-खलिहानों के हरे-भरे प्राकृतिक माहौल में स्थित है श्री काली भैरव तंत्र पीठ। ब्रह्म मुहूर्त में जब सामूहिक सुर में मंगलाचरण और गायत्री मंत्र गुंजायमान होते हैं, तो असीम शांति ऊर्जा का अनुभव होता है।
बेंगलुरू के बाद बठिंडा मेंं बनारस से मान्यता प्राप्त बटुक भैरव जी का मंदिर है।
मलोट रोड पर सिद्धपीठ के तौर पर श्री काली भैरव तंत्र पीठ के नाम से स्थापित है, जहां मां महाकाली जी विराजमान हैं।
यहां स्थापित श्री प्रखर परोपकार मिशन रोशन लाल जिंदल संस्कृत महाविद्यालय में सभ्यता, संस्कृति कर्मकांड की दीक्षा नि:शुल्क दी जाती है। महाविद्यालय के छात्र ही पूरे विधि-विधान से मंदिर में बटुक भैरव जी का स्नान करवाते हैं एवं वस्त्रादि बदलते हैं।
फ्रीमिलता है ज्ञान
संस्कृतमहाविद्यालय में राजस्थान, उत्तरांचल, हिमांचल, पंजाब, मध्यप्रदेश बिहार प्रदेश के 29 बच्चे शास्त्री एवं आचार्य की दीक्षा ले रहे हैं और वो भी एकदम नि:शुल्क। प्रवेश से पूर्व शिष्य का दस विधि स्नान से शुद्धिकरण होता है। प्रत्येक साल रक्षाबंधन के दिन हरिद्वार में दो घंटे तक गंगा में ठहराते हुए श्रावणी उपाकरण संस्कार किया जाता है, ताकि छात्रों के मन-कर्म-वचन के तमाम पाप धुल जाएं और व्यसनों से दूर रहने को वे संकल्पित हों। बनारस विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त संस्कृत महाविद्यालय में दाखिला लेने की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता आठवीं पास है।
सर्वप्रथम मध्यमा में प्रवेश मिलता है, इसके उपरांत उत्तर मध्यमा, पूर्व मध्यमा, शास्त्री एवं आचार्य की दीक्षा दी जाती है जोकि क्रमश: 8वीं, 10वीं, बारहवीं, बीए एमए के समकक्ष है। संस्कृत महाविद्यालय में यज्ञ, गायत्री मंत्र, वेद पढ़ाए जाते हैं। यहां की पूजा विधि सबसे अलग है। दिनचर्या की शुरुआत सुबह 5 बजे से होती है। स्नानादि से निवृत्त होकर पूजा-अर्चना के बाद सुबह 8 बजे संस्कृत में प्रार्थना होती है, जबकि 9 से 12.40 बजे तक कक्षा चलती है। 2 बजे कुछ समय का विश्राम होता है। फिर शाम 4 बजे तक अभ्यास, 5 बजे तक श्रमदान, खेलकूद के उपरांत शाम 6 से 8 बजे तक सायंकाल आरती और 10 बजे शयन का समय तय है। महामंडलेश्वर स्वामी श्री प्रखर जी महाराज की रहनुमाई में बटुक भैरव जी के मंदिर श्री काली भैरव तंत्र पीठ की स्थापना मलोट रोड पर साल 2000 में की गई थी। लगभग 500 वर्ग गज में