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सौभाग्य से मिलता है सत्संग का अवसर

7 वर्ष पहले
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कथा-सत्संगमें भगवान से मिलन का सौभाग्य प्राप्त होता है। जिस प्रकार मां अपने बच्चे को गोद में लेकर उस पर अपना स्नेह लुटाती है। उसी प्रकार सत्संग में भगवान का प्यार लुटाया जाता है। इस अवसर को हासिल करने से चूकना नहीं चाहिए। ये प्रवचन स्वामी भुनेश्वरी देवी जी ने सत गुरू सेवा समिति द्वारा न्यू शक्ति नगर में आयोजित पांच शाम कन्हैया के नाम संगीतमयी संध्या के दूसरे दिन वीरवार को दिए।

उन्होंने कहा कि गुरुदेव की कृपा बरस रही है। जिसका कोई अंत नहीं, पर अफसोस कि हम उसे देख नहीं पा रहे। उसका लाभ नहीं ले पा रहे। इसके लिए लाजिमी है हम ठाकुर जी को रिझाएं। लेकिन वो गुण तभी सकेगा, जब समर्पण का भाव जागृत होगा। मैं से हुई शुरुआत तू पर आकर समाप्त होनी चाहिए, क्योंकि जब मैं आती है तो अहम भाव जगते हैं जबकि प्रभु को पाने के लिए इच्छा और समर्पण दोनों भाव चाहिए। जब तक प्राणी उस परम शक्ति में डूब, खो नहीं जाता।तब तक लाभ-हानि का पता नहीं चलता। सुनते रहो, सुनते रहे और एक दिन यही प्रेरणा मन में घर कर जाएगी और इसी विश्वास से हम कथामृत कर रहे हैं कि जीव का कल्याण हो। कथा सभी सवालों को शांत कर देती है। कोई भूला-भटका हुआ भी कभी कथा-सत्संग में आता है तो खाली हाथ नहीं लौटता। प्रभु से सुख-शांति और सम्पत्ति के साथ-साथ सम्मति भी मांगो।

उन्होंने गुरुनानक देव जी के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का व्याख्यान करते हुए एक ओंकार, सत्य, अजुनी, अकाल पुरख की महत्ता बताते हुए कहा कि इन शब्दों के भाव और मर्म तभी समझ आएंगे, जब गुरु की मेहर होगी। संतों की सेवा करें और अपने ईश्वर के प्रति पूरी तरह समर्पित हो जाएं। इस अवसर पर उनके द्वारा गाए श्वासां दी माला नाल सुमरां मैं तेरा नाम, बन जावां बंदा मैं तेरा कृपा निधान भजन सुन श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर भक्ति भाव में डूब गए।

स्वामी भुवनेश्वरी देवी जी प्रवचन देती हुई।