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शूगर है अंधेपन का बड़ा कारण

7 वर्ष पहले
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पंजाबऑफ्थेलमोलॉजिकल सोसायटी का 18 वां वार्षिक कांफ्रेंस सेंट्रल यूनिवर्सिटी कैंपस में शुरू हुआ। डॉक्टरों के इस कुंभ में नार्थ इंडिया से करीब 400 आई सर्जन हिस्सा ले रहे हैं। कांफ्रेंस का शुभारंभ शनिवार को सेंट्रल यूनिवर्सिटी के चांसलर प्रो. एसएस जोहल ने शमां रोशन कर किया।

इस बार कांफ्रेंस का थीम थर्ड आई रखा गया है। भारत के अलावा पाकिस्तान के आई सर्जन भी कांफ्रेंस में हिस्सा लेकर अपने देश में आंखों के एडवांस रिसर्च की जानकारी दे रहे हैं।

साइंटिफिकसेशन के दौरान माहिरों ने विभिन्न टॉपिक पर दिए लेक्चर : शनिवारको कांफ्रेंस साइंटिफिक सेशन का समर्पित रहा। इस साइंटिफिक सेशन के दौरान डॉ.दविंदर सूद ने ग्लूकोमा अपडेट के बारे में जानकारी दी। वहीं उन्होंने हॉल में मौजूद डॉक्टरों के सवालों के जवाब भी दिए। फरीदकोट के डॉक्टर मनदीप कौर ने ग्लूकोमा के क्षेत्र में हो रही शोध के बारे में अपने विचार रखे। वहीं डॉ.मोनिका ने फेको के ऊपर कंपरेटिव स्टडी के बारे में जानकारी दी। डॉ.इंदू आर सिंह ने शुगर पेशेंट की आंखों की बीमारी उसके निदान के बारे में जानकारी दी। वहीं डॉ.अजय कपूर ने रेटिना सर्जरी के साथ जुड़ी मिथ रियलटी विषय पर अपने विचार रखे।

आंखोंका रखे ध्यान: डॉ.धामी : लुधियानाके सीनियर आई सर्जन डॉ.जीएस धामी ने आंखों की देखरेख संबंधी जरुरी टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि हर आंखें अलग होती है। उपकरण नहीं, डॉक्टरों का तजुर्बा काम करता है। डॉ.धामी ने बताया कि मोतियाबिंद अलग-अलग प्रकार का होता है। 40 साल से अधिक उम्र वाले व्यक्ति को अपनी आंखों की जांच रुटीन में करवानी चाहिए। डॉ.धामी ने कहा कि आंखों के संबंध में सेल्फ मेडिकेशन कतई नहीं करनी चाहिए। ऐसा करना घातक हो सकता है

शूगर होने के बाद मरीज को समय-समय पर चेक करवाते रहनी चाहिएं आंखें: डॉ.बराड़

शूगररोग अंधेपन का सबसे बड़ा कारण भविष्य में बन सकता है। अक्सर शुगर रोगी शूगर होने की सूरत में शूगर की मेडिसन लेते रहते हैं। ऐसे शूगर रोगी अपनी आंखों की जांच आई सर्जन से समय पर नहीं करवाते। शूगर रोगी को मोतियाबिंद होने का डर भी रहता है। इसलिए अगर किसी भी व्यक्ति को शूगर है तो वे समय समय पर आई स्पेशलिस्ट से अपनी जांच करवाएं। डॉ.बराड़ ने बताया कि शुगर होने के कारण केटारेक्ट, पुतली का जाम होना मोतियाबिंद के गिर जाने का भय भी रहता है। शूगर रोग आंखों क