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- 31 मार्च से शुरू होनी थी ओपीडी अभी बिल्डिंग नहीं हुई हैंडओवर
31 मार्च से शुरू होनी थी ओपीडी अभी बिल्डिंग नहीं हुई हैंडओवर
करीब200 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले एडवांस कैंसर डाइग्नोस्टिक सेंटर के लिए अभी और इंतजार करना होगा। प्रिंसिपल सेक्रेटरी हेल्थ और मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल ने भले ही इसे चलाने के लिए मार्च 2014 की डेडलाइन दी थी, मगर दिसंबर भी आधा गुजर गया और अभी भी इस अस्पताल के चलने के कोई आसार नजर नहीं रहे। अस्पताल की इमारत ही जो जनवरी 2014 में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी को हैंडओवर कर दी जानी थी, अभी तक नहीं हो पाई है। यूनिवर्सिटी के बार-बार विज्ञापन जारी करने के बावजूद पर्याप्त डाक्टर नहीं मिल रहे।
कंपनीको नहीं हुई चार करोड़ की अदायगी
यूनिवर्सिटीके सूत्रों के मुताबिक जब इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली तो यह 60 करोड़ का था, जिसमें 50 बैड के अस्पताल के लिए 28 करोड़ खर्च करने थे, जिसका कांट्रेक्ट केंद्र सरकार की सलाहकार एजेंसी एचएससीसी को सौंपा गया था। कंपनी ने कांट्रेक्ट देकर प्रोजेक्ट पर 2012 में काम शुरू करवा दिया था। इसी बीच इसे 100 बैड का अस्पताल कर दिया और 4 मंजिलें कर दी गई।
इमारत की लागत बढ़कर 39 करोड़ हो गई। कंपनी को अभी तक 35 करोड़ की ही अदायगी हुई है और यह राशि भी कंपनी पटियाला में करवाए जा रहे निर्माण की अदायगी मानकर चल रही है। करीब 20 करोड़ के लेने देने का विवाद है जो अनसुलझा है।
इससाल अगस्त में भर्ती किए गए थे डॉक्टर
सेंटरके लिए डायरेक्टर की नियुक्त कर दी गई है। मगर इसे चलाने के लिए उपयुक्त डाक्टरों की भर्ती प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो पाई। यूनिवर्सिटी ने अगस्त 2014 में एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी के 2 एसोसिएट प्रोफेसर, रेडियोलॉजी के 1 असिस्टेंट प्रोफेसर, 2 मेडिसन के एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर, रेडियोथैरेपी टेक्नालॉजी के एक ट्यूटर, एनेस्थीसिया रेडियोलॉजी के एक प्रोफेसर, 2 जनरल मेडिसन डाक्टर सहित अन्य स्टाफ की भर्ती के लिए विज्ञापन दिया था। इसके बाद नवंबर 2014 में फिर से भर्ती के लिए विज्ञापन दिया।
दो डाक्टरों को भर्ती किया गया, मगर इनमें से एक अस्पताल शुरू होने से पहले ही छोड़ गया। सूत्रों के मुताबिक प्राइवेट सेक्टर में कैंसर विशेषज्ञ डाक्टरों को अच्छा वेतन मिलने से वह रुचि नहीं दिखा रहे।
टीएमसीसे मशीनें आनी अभी बाकी
इमारतके ग्राउंड फ्लोर का जो कुछ हिस्सा तैयार हुआ है वहां पर अभी तक मात्र तीन मशीन ही इंस्टॉल हो पाई है। इसमें कैंसर के इलाज के लिए कोवाल्ट मशी