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शुरू होने से पहले बंद हुई इवनिंग ओपीडी

7 वर्ष पहले
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बठिंडा। सिविल अस्पताल में आम लोगों के लिए शुरू होने वाली इवनिंग ओपीडी शुरू नहीं हो सकी है। शाम के समय मरीजों को डाक्टरी सुविधा मिल सके इस लिए विभाग ने इवनिंग ओपीडी शुरू करने की घोषणा की थी। दिसंबर में नई ओपीडी का रोस्टर नहीं बन सका। इसके पीछे विभाग डाक्टरों की कमी बता रहा है। वहीं सूत्रों की माने तो डाक्टरों के विरोध के चलते ऐसा नहीं हो सका है। सिविल अस्पताल में जनता को अब दो बार ओपीडी की सुविधा मिलनी थी।
अव्यवस्था : सिविल अस्पताल में तैनात डाक्टरों का कहना है कि उनके पास पहले से ही ढेर सारे काम विभाग की तरफ से दे रखे हैं। गौर हो कि स्पेशलिस्ट डाक्टर काफी लंबे समय से विभाग से मांग कर रहे हैं कि उनकी ड्यूटी विभाग एमरजेंसी,पोस्टमार्टम ड्यूटी वीआईपी ड्यूटी पर लगाई जाए। इनसे उनका रुटीन का काम काफी हर तक प्रभावती हो रहा है। स्पेशलिस्ट डाक्टरों का वफद कई बार इस सिलसिले में सिविल सर्जन अन्य सेहत अधिकारियों को भी मिल चुका है। स्पेशलिस्ट डॉक्टर इसलिए ओपीडी के शुरु होना का विरोध कर रहे थे।

शाम 6 बजे तक होनी थी ओपीडी : इवनिंग ओपीडी के तहत सिविल अस्पताल की ओपीडी शाम छह बजे तक खुलनी थी। जिसमें स्पेशलिस्ट डॉक्टर ओपीडी में हाजिर रहना था। विभाग को दो शिफ्टों में डॉक्टरों से ओपीडी करवानी थी। ईवनिंग ड्यूटी उन डॉक्टरों की लगाई जानी थी जिनकी संख्या 2 से अधिक है। विभाग के अधिकारियों के पास ईवनिंग ओपीडी शुरू करने का फरमान तो अधिकारियों से मिल गया था पर स्टाफ की कमी को देखते हुए ऐसी सुविधा को शुरू नहीं किया जा सका। डाक्टरों के अलावा अन्य स्टाफ को भी अस्पताल में अपनी सेवा देनी थी जो कि प्रेक्टिकल तौर नहीं हो सकती थी। इस लिए विभाग ने इसे शुरू करना ही बेहतर समझा।

हमारे पास स्टाफ की कमी है : ''हमारे पास स्टाफ डाक्टरों की कमी है। जिसके चलते ईवनिंग ओपीडी शुरू नहीं की जा सकी है। स्टाफ अगर पूरा हो तो ईवनिंग ओपीडी जरूर शुरू की जाएगी।''- डॉ.सतीश गोयल,सीनियर मेडिकल ऑफिसर,सिविल अस्पताल।
एसोसिएशन कर रही थी विरोध : शाम के समय मरीजों को सुविधा मिल सके इसलिए बनाई थी योजना, ओपीडी रोस्टर ही नहीं बन पाया।