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भक्ति की बजाय व्यर्थ कार्यों में उलझा है इंसान

6 वर्ष पहले
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बठिंडा|जुझार सिंहनगर की गली नंबर-एक में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के दौरान शनिवार को वृंदावन धाम से पधारे स्वामी देव नारायणाचार्य जी महाराज ने आठवें स्कंद में वर्णित गजानन की प्रभु भक्ति का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि गजानन को ग्राह(घड़ियाल) जब अपनी ओर खींचता है, तो गजेंद्र कमल पुष्प लेकर प्रभु से विनय करते हैं कि हे प्रभु, हमारी प्रार्थना है कि अभिनव सुगंध से परिपूर्ण कमल पुष्प हम आपके चरणों में अर्पित कर सकें। ऐसी कृपा करें। प्रभु मुझे दर्शन दें। ये कमल तो कहने को पुष्प है परंतु हम अपनी आत्मा रूपी पुष्प को आपके चरणों में अर्पित करना चाहते हैं। स्वामी जी ने कहा कि मानव चोला ग्रहण करने के बाद भी मनुष्य पशु योनि में जी रहा है। चौरासी लाख योनियों के बाद मानव का चोला मिलता है, परंतु इंसान इसे आर्थिक, सामाजिक पारिवारिक उलझनों में उलझाकर व्यर्थ ही गंवा देता है तथा अंत समय में परमात्मा को याद करता है। थर्मल कॉलोनी के हरि मंदिर के आचार्य रामकुमार शास्त्री ने श्रीमद् भागवत की विधिपूर्वक आरती की।

देव नारायणाचार्य जी कथा सुनाते हुए।