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मंडी बोर्ड का दफ्तर है या पुलिस का कबाड़खाना

7 वर्ष पहले
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कबाड़वाहनों की शरणस्थली बनता जा रहा है मंडी बोर्ड का दफ्तर। वाहन कहीं से भी जब्त किया जाए, उसे मंडी बोर्ड के दफ्तर में ही लाकर स्टोर कर दिया जाता है और यह सिलसिला करीब 10 वर्षों से चल रहा है। इतना ही नहीं,दफ्तर के ज्यादातर कमराें में पुलिस के अलग अलग विंग हाेने से यहां पुलिस का कब्जा है। इसी कारण मंडी बोर्ड दफ्तर कबाड़ खाना नजर आता है।

18साल पुराने वाहन,पुलिस को नहीं मिला इनके फैसलों का रिकार्ड : हैरानीकी बात तो ये है कि माल खाने के इस भंडार मेंं 18 साल पुराने वाहन भी मौजूद है जिनका अस्तित्व समाप्ति की ओर है। माल खाने में साल 1996 से लेकर 2000 तक की अवधी वाले वाहनों के फैसलों का रिकार्ड नहीं मिला है। इनके वारिसों का भी कोई पता नहीं। 1996 का 1 स्कूटर,97 का 1 स्कूटर,99 का 1 स्कूटर,2000 के 3 स्कूटर। लेकिन पुलिस को आज तक इन वाहनों के केस फैसलों का रिकार्ड नहीं मिला है।

इसी तरह माल खाने के भंडार में साल 2003 का 1 स्कूटर, साल 2004 का 1 स्कूटर,साल 2007 का 1 मोटरसाइकिल,1 स्कूटर, साल 2008 का 1 मोटरसाइकिल,1 स्कूटर, साल 2009 की 1 स्कूटी,1 कार,साल 2010 के 2 मोटरसाइकिल,3 कार 1 स्कूटर, साल 2011 के 3 मोटरसाइकिल,1 स्कूटी,1 कार, साल 2012 के 26 मोटरसाइकिल,2 स्कूटी,2 जीप,1 कार, साल 2013 की 9 कारें,1 स्कूटर,5 मोटरसाइकिल, इस साल यानि 2014 के 6 कारें 8 मोटरसाइकिल मौजूद हैं। इनमें से ज्यादातर अंडर ट्रायल अदालतों में विचाराधीन केस प्रापर्टी है।

कइयोंका अस्तित्व समाप्ति की ओर : इनमेंकई ऐसे वाहन भी हैं जिनका अस्तित्व लगभग समाप्ति की तरफ है दाना मंडी की इमारत में बने थाना कोतवाली के मालखाने में सैकड़ों चार पहिया, दोपहिया वाहन वर्षों से जंग खा रहे हैं. व्हीकल्स दोपहिया हो या चारपहिया, एक्सीडेंट का हो या लावारिस हालत का एक बार माल खाने की सीढ़ी चढ़ गया उसकी जिंदगी बर्बाद हो जाती है. उसकी बैटरी, स्टेपनी, नट बोल्ट, पहिया, ट्यूब-टायर, कभी-कभार पूरा इंजन भी गायब हो जाता है. कारों मेंं लगे म्यूजिक सिस्टम का भी कुछ अता पता नहीं चल पाता।

ऐसे वाहनों की पर्याप्त देखरेख होने के चलते वे जंग खा रहे हैं। ऐसा होने से उक्त वाहनों की बाजार की कीमत केवल कम हो रही है, बल्कि वह कबाड़ के ढेर में भी तब्दील हो रहे हैं। मालखाने में पड़े पड़े इन वाहनों का हिसाब किताब रखने में भी माल खाना कर्मियों को बेहद कठि