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बठिंडा से निकले 4 हाफिज की दस्तारबंदी

7 वर्ष पहले
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इलाकेके लिए बड़े फख्र की बात है कि पहली बार चार हाफिज बने हैं। गोसुल आलम मेमोरियल एजुकेशनल सोसाइटी लखनऊ के प्रेजीडेंट पीर-ओ-मुर्शिद सैयद मोहम्मद अशरफ अशरफी जिलानी किछोछा शरीफ 1 मार्च को इनकी दस्तारबंदी कराएंगे।

समागम में पंजाब से जिला इमाम एवं मुस्लिम समाज के प्रमुख व्यक्ति एवं तमाम मुस्लिम भाईचारा शिरकत करेंगे।

आवा बस्ती स्थित जामे अशरफ बाबा हाजीरतन इस्लामिया मदरसा से तीन सालों से तालीम ले रहे 17 वर्षीय मोहम्मद रागीब अशरफी वासी कटिहार बिहार, 17 वर्षीय मोहम्मद तालिब वासी अजमेर राजस्थान, 17 वर्षीय मोहम्मद अफसर वासी कटिहार बिहार एवं 14 वर्षीय गुलाम मोइनुदीन वासी कटिहार बिहार ने हिफ्ज मुकम्मल कर लिया है और इन्हें कुरान शरीफ जुबानी याद है। हाफिज बने ये बच्चे इसी मदरसे से अब मौलाना बनने के लिए तीन साल और तालीम लेंगे।

मुस्लिम ह्यूमन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से मदरसा में इन बच्चों को नि:शुल्क तालिम के अलावा खाने रहने का खर्च वहन किया जाता है। अगले चरण में इसी मदरसा से 10 और बच्चे हाफिज की तालीम ले रहे हैं।

सचिव जमील अहमद ने बताया कि मदरसा स्थल पर 1 मार्च को शाम 5 बजे उरसे सरकारे कलां मुखतारे दो आलम कांफ्रेंस का आयोजन हो रहा है। विशेष तौर पर पधार रहे सदर आल इंडिया उलामा मसाइख बोर्ड किछोछा पीर-ओ-मुर्शिद सैयद मुहम्मद अशरफ अशरफी जिलानी इन हाफिजों की दस्तारबंदी करेंगे।

इस ऐतिहासिक मौके को देखने इन बच्चों के वालिद भी पहुंचे हुए हैं। जलसा सिरतुल नबी, इमाम अहमद राजा सोसाइटी, ख्वाजा गरीब यंग सोसाइटी एवं सिम्मना सोसाइटी की ओर से बंदोबस्त में सहयोग रहेगा।

यह मुबारक मौका इलाके के लिए गर्व की बात है

^1947के बाद पहली बार बठिंडा की सरजमीं पर दस्तारबंदी का मुबारक मौका इलाके के लिए गर्व की बात है। हाफिज बने ये बच्चे अब युवा पीढ़ी को कुरान शरीफ से जोड़ेंगे ताकि युवाओं में अपने धर्म के प्रति आस्था प्रगाढ़ हो और अमनो-अमान का प्रसार हो। रमजाननईमी अशरफी, जिला इमाम, जाम मस्जिद

तािलम लेते हाफिज बनने वाले बच्चे।