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- धर्म और भगवान का विरोध करने वाला इंसान कभी सुखी नहीं रहता
धर्म और भगवान का विरोध करने वाला इंसान कभी सुखी नहीं रहता
पावरहाऊस रोड गली नंबर 4 के शिव मंदिर में संतमत सत्संग समिति की ओर से कराई जा रही श्रीमदभागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन बुधवार को स्वामी व्यासानंद जी देहरादून वालों ने सुबह के सत्र में जहां मनु के पुत्रों की कथा सुनाई। वहीं शाम को भक्त प्रहलाद का भक्ति का वृत्तांत सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हुए।
स्वामी जी ने सरल शब्दों में हरिण्यकश्यप और हिरणाक्ष का खुद को भगवान मानते हुए पुत्र प्रहलाद पर अत्याचार करना जबकि प्रहलाद का विष्णु भक्ति में लीन रहना और अपने भक्त पर आई विपदा को हरने के लिए भगवान का श्री नृसिंह अवतार लेकर हरिण्यकश्यप का उद्धार किया।
स्वामी व्यासानंद जी ने कथा में भक्तों के चरित्र का वर्णन करते हुए फरमाया कि देवता, वेद, शास्त्र, गाय, ब्राह्मण, साधु, धर्म और भगवान से द्रोह नहीं करना चाहिए।
कथा के क्रम में स्वामी जी ने 28 प्रकार के नरक का वर्णन भी किया। उन्होंने फरमाया कि संतों के सान्निध्य में ही प्रभु भक्ति का मार्ग छिपा है और यह अक्षरशः: सत्य है कि जब तक संतों के चरणों का आश्रय मानव नहीं लेगा, तब तक उसका उद्धार नहीं हो सकता। इस मौके पर उपस्थित सैकड़ों महिला पुरुष श्रद्धालुगण भक्ति भाव से भरे भजन सुन झूमते रहे।
स्वामी व्यासानंद जी प्रवचन देते हुए।
100 फीट रोड के शिव मंदिर में चल रही कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु।