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सात साल में बंद हो गए 321 कॉटन मिल, कई और बंद होने के कगार पर
मंगलवारको बठिंडा में पंजाब राज बिजली रेगुलेटरी कमिशन की चेयरपर्सन रोमिला दुबे मेंबर जीएस घुम्मन ने फील्ड होस्टल में आम लोगों की समस्याएं सुनीं। भले ही यह समागम आम लोगों के लिए था, लेकिन आम लोगों को इस प्रोग्राम की कोई जानकारी नहीं थी।
इससे इस समागम में बहुत कम लोगों ने हिस्सा लिया। कुछ उपभोक्ताओं ने इस पर आपत्ति भी दर्ज कराई, कि इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। जो भी उपभोक्ता इस प्रोग्राम में हाजिर हुए, उन्होंने सिस्टम को पूरे तौर पर इसके लिए दोषी ठहराया।
जब गलती हमारी नहीं तो क्यों करें लिखित शिकायत
^चारमहीने का बिल 1 लाख 56 हजार रुपये आया। मैंने इस संबंध में एसडीओ से बात की, तो बोले कि आप लिखती शिकायत करें। जब मैंने गलती ही नहीं की तो, लिखत रूप क्यों दूं। गलती पावरकॉम की है। पावरकॉम दफ्तर में जाने के लिए पूरा दिन चाहिए होता है। वहां पर एक मैडम होती हैं। अगर वो नहीं होती तो काम नहीं हो पाते। जीएमशर्मा, कोचिंग सेंटर संचालक
मामलों का हल नहीं निकला तो दिल्ली जैसा ही हाल होगा
^अगरलोगों की समस्याओं का समाधान नहीं किया तो पावरकॉम का हाल भी दिल्ली जैसा ही होगा। पेट्रोल डीजल की कीमतें कम हो रही हैं, फिर भी जनता को राहत देने की बजाय बिजली का टैरिफ बढ़ाने पर विचारें चल रही हैं। रेगुलेटरी कमिशन सरकार के हितों को छोड़ कर आम लोगों के हितों की बात करे। आरडीगुप्ता, पार्टनर, फारमेस्टीकल कंपनी
पावरकॉम को पैसे देने हैं या फिर पाने है यह कौन बताएगा
^रेटरिवाइज होने के बाद हमें अभी तक यह नहीं पता है कि हमने पावरकॉम को पैसे देने हैं या हमने लेने हैं। पावरकॉम के अफसरों और कर्मचारियों से कई बार इसके बारे मैं पूछ चुका हूं, लेकिन इसका किसी ने कोई जबाव नहीं दिया। आखिर इसका कोई तो जवाब होगा, मंथली 5 करोड़ रुपये का बिल अदा करते हैं। मैनेजर,स्पोर्ट किंग
गोपनीय तरीके से रेगुलेटरी की बैठक करना गलत है
^बेहदगोपनीय तरीके से रेगुलेटरी कमिशन की यह बैठक की जाती है, जो गलत है। होर्डिंग लगाकर इसका प्रचार किया जाना चाहिए। बिजली का बिल इस प्रकार का होता है जैसे दसवीं क्लास का मैथ का पेपर हो। पूरी वायरिंग अंडरग्राउंड की जानी चाहिए। बड़ी चोरी करनेवालों को कुछ नहीं कहा जाता है। डॉ.गुरमेल सिंह मौजी, सीनियर सिटीजन
पहले कॉटन मिल में 45 हजार काम करते थे, अब 8 हजार
^2007में पंजाब में 422 काटन फैक्ट्रियां थी, जिसमें 45 हजार लोग काम करते थे। अब सिर्फ 111 रह गई हैं, उसमें अब सिर्फ 8 हजार लोग ही रह गए हैं। ऐसे में सात सालों में 37 हजार लोग बेरोजगार हो गए हैं। यदि बिजली टैरिफ इसी प्रकार बढ़ता रहा, तो आने वाले समय इससे भी बदतर स्थिति हो जाएंगे। भगवानबंसल, प्रधान, जिनिंग मिल एसोसिएशन
मिनिमम बिजली बिल खत्म किया जाए
^मिनिममबिजली बिल खत्म किया जाना चाहिए। बिजली के बढ़ते रेट और रेगुलर बिजली सप्लाई नहीं होने से इंडस्ट्री तो पहले ही बंद होने की कगार पर है। सब्सिडियों को बंद किया जाना चाहिए और शहरियों का डिस्क्रीमिनेशन किया जाए। मोहनजीरतपुरी, महासचिव, चैंबर ऑफ कॉमर्स
एसएमएस से भेजना चाहिए बिजली बिल
^लाइनमैनोंके पास तो सीड़ी होती है और ही दूसरे एक्यूपमेंट। वो हमारे पास आते हैं और सीढ़ी की मांग करते हैं। आजकल कहां सीढ़ी मिलती है। इसके अलावा थोड़ा हाइटेक होने की जरूरत है और बिजली बिल एसएमएस के जरिए भेजना शुरू होना चाहिए। शिवचरनसिंह, वासी मुक्तसर
पीक आवर के टैरिफ एक रुपए यूनिट हो
^हिमाचलप्रदेश, हरियाणा, गुजरात, एमपी केरल सहित अन्य कई स्टेटों में बहुत कम टैरिफ है। पीक टाइम के 3 रुपये युनिट ज्यादा वसूले जा रहे हैं। इसे एक रुपया प्रति यूनिट किया जाए। काऊ सेस बंद होना चाहिए। सवा लाख प्रति महीना काऊ सेस पड़ रहा है। राजिंदरपाल,एजीएम(एडमिन), वर्धमान
सप्लाई कोड के अगेंस्ट कनेक्शन दिए जा रहे हैं
^पीएसईबीके सप्लाई कोड़ के अगेंस्ट जाकर कालोनियों को कनेक्शन दिए जा रहे हैं। जबकि प्राइवेट कालोनियों को स्ट्रीट लाइट के कनेक्शन नहीं दिए जा सकते हैं। पावरकॉम उनसे मिनिमम चार्ज वसूल करता है, तभी वह अपनी पूरे लाइटें चला कर रखते हैं। हरपालसिंह, कंज्यूमर अवेयरनेस एसो.
यही हाल रहा तो बैठक की जरूरत नहीं पड़ेगी
^मैंहर साल एक करोड़ 70 लाख रुपये का बिजली का बिल अदा करता हूं। बिजली के कारण पूरी इंडस्ट्री बंद होने की कगार पर है। यदि यह ही हाल रहा तो रेगुलेटरी कमिशन को इस तरह की बैठकें करने की भी जरूरत नहीं रहेगी। क्योंकि कोई इंडस्ट्री ही नहीं रह जाएगी। सुरेशकुमार, उद्योगपति, बठिंडा
बिजली उप्भोक्ताओं के सवालों के जबाव देते हुए चीफ इंजीनियर।