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कथा श्रवण सबसे बड़ा तप: पं. विजय

5 वर्ष पहले
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पटेलनगर के श्री माता वैष्णो मंदिर में संगीतमयी श्रीमददेवी भागवत कथा के उपलक्ष्य में शुक्रवार की शाम भव्य कलश यात्रा निकाली गई। पं. विजय गौड़ की अध्यक्षता में मंदिर प्रांगण से प्रारंभ हुई कलश यात्रा में 51 महिलाएं मंगलगान करते हुए शामिल हुई। शोभायात्रा पटेल नगर की परिक्रमा करते हुए कथा स्थल मंदिर के हाल में संपन्न हुई जहां कलश स्थापित किए गए।

व्यासपीठ पर विराजमान पं. विजय गौड़ ने भागवत पूजन के साथ कथा प्रारंभ की। उन्होंने कहा कि कथा हमें धर्म पर चलना सिखाती है, कलियुग में कथा श्रवण सबसे बड़ा तप है क्योंकि नवदा भक्ति में भी पहले प्रकार की भक्ति श्रवण करना ही बताया गया है। पंडित जी ने बताया कि रामायण में मनु के माध्यम से भगवान जी कहते हैं - जे सुनि सादर नर बड़भागी, भवतरिं ममता मद त्यागी। अर्थात जो परमात्मा के चरित्र को आदरपूर्वक सुनते हैं, वो भव से पार हो जाते हैं। देवी भागवत सुनने से धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है। पंडित विजय गौड़ बोले कि धर्म करने से सुख की प्राप्ति होती है। धर्म दो प्रकार के होते हैं, एक लौकिक और दूसरा पारलौकिक धर्म। इस दौरान उन्होंने बसंत पंचमी की महत्ता बताते हुए हकीकत राय, पृथ्वीराज चौहान, गुरु गोरखानाथ की कथा सुनाई गई। पटेल नगर महिला संकीर्तन की मेंबर रेणु सिंगला ने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन 3 से शाम 6 बजे तक कथामृत होगी जबकि 18 फरवरी को समापन पर भोग आरती भंडार प्रसाद वितरण होगा। मंदिर कमेटी के प्रधान सोमराज गर्ग, धर्मपाल बांसल, सुशील गोयल, रमेश चंदर गुलाटी, उमा, तृप्ता, रेखा, संतोष, अनीता, विनीता, मधु, संजू समेत सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा का आनंद लिया।

कथा करते पं. विजय गौड़।

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