जिले के चार आईवीएफ सेंटर निशाने पर
80 करोड़ की बेनामी संपत्ति, बिना बिल का गोल्ड और डायमंड जब्त
रॉयलज्वेलर्स और जिंदल हार्ट इंस्टीट्यूट एंड टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर में वीरवार को आयकर विभाग की टीम के साथ की गई सीबीआई की छापामारी की कार्रवाई शुक्रवार देर शाम तक जारी रही।
चौबीस घंटे से ज्यादा चली इस कार्रवाई में संचालकों से 80 करोड़ की बेनामी संपत्ति मिलने का पता चला है। दोनों जगहों पर कस्टम चोरी करके करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई है। फिलहाल टीम ने सभी कागजातों को अपने कब्जे में ले लिया है।
करोड़ों रुपये की कस्टम चोरी करके जिंदल हार्ट इंस्टीट्यूट में मशीनें लाई गई हैं। रॉयल ज्वेलर्स के संचालक ने करोड़ों रुपए के सोने का आयात किया है। इसे लेकर कुछ कागजात भी टीम के हाथ लगे हैं। जांच में करीब 45 करोड़ रुपए की कस्टम चोरी का पता चला है।
रॉयल ज्वेलर्स में छापे की कार्रवाई खत्म करने के बाद टीम छह अटैची के साथ निकली। इस दौरान कई किलो सोना भी जब्त किया गया है जो गैरकानूनी तरीके से लाया गया था।
इसी तरह जिंदल हार्ट इंस्टीट्यूट में छापे के दौरान टीम के पता चला कि टेस्ट ट्यूब बेबी करवाने के लिए आने वाली महिलाओं से मोटी रकम वसूलने के बाद उसे रजिस्टर में दर्ज नहीं कर हेराफेरी की जाती थी।
जांच के बाद होगा सही राशि का खुलासा
आयकरविभाग लुधियाना के डिप्टी डायरेक्टर आदित्य शुक्ला और जम्मू कश्मीर रेंज के ज्वाइंट डायरेक्टर सतबीर सिंह ने बताया कि दोनों प्रतिष्ठानों में करोड़ों रुपए के आयकर चोरी का अब तक खुलासा हुआ है। इसमें राशि कितनी है इसकी जांच चल रही है। इसमें शनिवार तक ही स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों संस्थानों ने अब तक कितना कर सरकार को अदा नहीं किया है।
भास्कर संवाददाता| बठिंडा
शहरके जिंदल हार्ट इंस्टीट्यूट के एक आईवीएफ सेंटर पर इनकम टैक्स की रेड के बाद शहर में हेल्थकेयर सेंटर में हड़कंप मच गया है। सूत्रों की माने तो अब आयकर विभाग शहर में चल रहे अन्य आईवीएफ सेंटर(टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर) पर भी रेड करेंगे। शहर में इस समय चार आईवीएफ सेंटर चल रहे हैं।
संचालकनहीं देते बिल :आईवीएफ सेंटर(टेस्ट ट्यूब बेबी) में इलाज महंगा है। सेंटर में बच्चे के चाह्वान दंपती से सेंटर संचालक 1.50 लाख से 2 लाख रुपए फीस वसूलते हैं। सेहत विभाग से जुड़े सूत्रों की माने तो अधिकांश मरीजों को सेंटर की तरफ से पक्की फीस का बिल नहीं दिया जाता है। गीता ने बताया कि उन्होंने ने शहर के एक आईवीएफ सेंटर से अपना ट्रीटमेंट लिया था। जिसके बदले उन्होंने एक लाख से अधिक की राशि नकद सेंटर में जमा करवाई। उन्हें पक्की रसीद नहीं दी गई। उसके ओपीडी पर्ची पर ही पेमेंट की डीटेल लिख दी थी। सूत्रों की माने तो इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि अगर मरीज का सफल ट्रीटमेंट हो सका तो पीड़ित अदालत का संरक्षण ले सकते हैं। किसी भी सेंटर ने अपने अस्पताल में ट्रीटमेंट की डीटेल नहीं लिखी है।