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पसीना बहा पार्क को बनाया हरा-भरा

6 वर्ष पहले
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मनसे प्रयास करें तो रेगिस्तान में भी फूल खिल सकते हैं, इस कहावत को सच किया है मॉडल टाउन फेज टू के सुरिंदर कुमार ने। दस साल पहले ऊबड़-खाबड़ खाली मैदान था, जहां आवारा पशु घूमते रहते थे। अब इस पार्क को देखकर नजरें नहीं हटती, खूबसूरती इतनी कि पार्क में घंटों बिताया जा सकता है। हरियाली इतनी कि लगता नहीं कि किसी घनी आबादी वाले नगर का एक हिस्सा है। इसका श्रेय जाता है इसी स्थान पर रहने वाले कुछ लोगों का। यह अन्य इलाके के निवासियों के लिए भी नजीर है।

लगभग दस साल पहले सुरिंदर कुमार ने इस पार्क को देखा तो उन्हें दुख हुआ कि इतनी जगह तो बठिंडा में देखने को नसीब नहीं होती और यहां है तो इसका विकास नहीं किया जा रहा है। इन्होंने पार्क के जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी लेते हुए ट्रैक्टर-ट्रालियों के जरिए यहां से कंक्रीट मलबा आदि उठवाकर जगह को समतल बनाया।

4150 सेक्येर यार्ड में पार्क नंबर 16 की पुडा के सहयोग से चारदीवारी करवाई। उन्होंने अपने पड़ोसियों मोहम्मद गफ्फार कुरैशी, गुरचरण सिंह जसपाल सिंह के साथ मिलकर खुद संवारने का बीड़ा उठाया। जेब से खर्च करके फेंसिंग लगवाने से लेकर पार्क की ऊबडख़ाबड़ जमीन को एक खूबसूरत लैंडस्केप का रूप देते हुए उस पर घास, फूलों के पौधे हरियाली फैलने वाले छायादार वृक्षों को बेहद करीने से सजाया है। टाहली, नीम, बकैन, जामुन, अमरूद, केला, नींबू, पाम, पीपल, बोहड़ के दर्जनों फलदार-छायादार पेड़ हरियाली को बढ़ा रहे हैं जबकि गेंदा, गुलाब, चमेली के रंगबिरंगे फूल पार्क में अपनी खुशबू बिखेर रहे हैं। पार्क में सुबह शाम जॉगिंग, योगा और झूला झूलते बच्चों की रौनक होती है।

पार्क में लगाए 10 बैंचों पर बैठकर जहां बुजुर्ग अथवा महिलाएं प्राकृतिक माहौल में समय बिताते हैं, वहीं पींग वाले चार झूलों के अलावा एक सी-सा झूला भी लगवाया है।

सुबह और शाम 2 घंटे करते हैं पार्क को मेनेटन

सुरिंदरकुमार नियमित तौर पर सुबह शाम के दो घंटे पार्क की मेंटेनेंस में लगाते हैं और बाकायदा पौधों की कटाई-छंटाई के अलावा पानी देकर आनंदित होते हैं। इस पार्क की साफ सफाई आदि का भी पूरा ध्यान रखते हैं ताकि इसके पौधों को नुकसान हो यहां आने वाले लोग ताजा हवा में सांस ले सकें। इस पार्क में नियमित रूप से माली आता है और इसकी देखभाल करता है। पानी में वाटर सप्लाई के लिए तीन कनेक्शन के अलावा सबमर्सिबल मोटर लगवाई गई है। पार्क की मेंटेनेंस पर लगभग 5000 रुपए खर्च आता है जबकि नगर निगम की ओर से मेंटनेंस के तौर पर पचास पैसा के हिसाब से एक हजार रुपए दिया जाता है।

फेज-टू के पार्क नंबर 16 में शाम के वक्त फाउंटेन चलाकर प्राकृतिक सौंदर्य के नजारे पर खुशी जताते सुरिंदर कुमार इनके साथी।