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रामभरोसे है यात्रियों की सुरक्षा, पीआरटीसी की अधिकांश बसों से गायब हो चुके हैं फर्स्ट एड बॉक्स, जो हैं वे महज दिखाने के लिए

7 वर्ष पहले
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बठिंडा. अगर आप पीआरटीसी की बसों में सफर कर रहे हैं तो अपने बैग में फर्स्ट एड बॉक्स जरूर रखें। बस में चोट लगने के बाद उम्मीद छोड़ दीजिए कि आपको फर्स्ट एड की सुविधा मिल जाएगी। पीआरटीसी की तमाम बसों से फर्स्ट एड बॉक्स गायब हो चुके हैं। अगर इस संबंध में आपको कोई सुझाव देना या शिकायत दर्ज करवानी है, तो वह भी नहीं हो सकेगी। क्योंकि पीआरटीसी की बसों से यह भी गायब हैं। कमोबेश यही हालत सिटी बसों की है। सिटी बसों में फर्स्ट एड बॉक्स तो लगे हैं, मगर उनके अंदर कुछ भी नहीं है। हर वर्ष सितंबर महीने के दूसरे शनिवार को वर्ल्ड फर्स्ट एड दिवस मनाया जाता है। इस दिवस पर समागम तो आयोजित किए जाते हैं। मगर इस दिन के बाद इस पर कोई भी अमल नहीं किया जाता।

फर्स्ट एड बॉक्स में ये सामान होने चाहिए

नियमों के अनुसार, रोडवेज की बसों में लगे फर्स्ट एड बॉक्स में आवश्यक दवाइयां, गोल पट्टियां, तिकोनी पट्टियां, दर्द से राहत देने वाली, मोच जख्मों पर लगाने वाली ट्यूब, कॉटन के पैकेट, डिटॉल, ओआरएस का घोल, बैंड एड, चिपकाने वाली पट्टी आदि सामान रहना चाहिए। लेकिन यहां की बसों में ऐसा कोई सामान नहीं है। अगर बस में कोई हादसा होता है, तो यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। इसके लिए यात्रियों को अपनी सुरक्षा खुद ही करनी पड़ती है।
कंडक्टरों को है फर्स्ट एड की जानकारी
बठिंडा बस स्टैंड में खड़ी कई बसों के कंडक्टरों से पूछताछ करने पर कंडक्टरों ने बताया कि उनको फर्स्ट एड की जानकारी तो है। मगर बस में इस प्रकार की कोई सुविधा नहीं है। अगर कोई हादसा होता है, तो वह अपने लेवल पर इसका समाधान ढूंढते हैं। इसके लिए पहले तो वह अपने आसपास मदद देखते हैं और अपने आगे-पीछे जाने वाली बसों से संपर्क बनाते हैं। इसके अलावा हादसा होने पर नजदीक के अस्पताल में पहुंचते हैं। कंडक्टरों के अनुसार भर्ती होने से पहले उनको यह सारी जानकारी दी गई है।

शिकायत पुस्तिका सुझाव पेटी भी नहीं
सफर में अगर यात्रियों को किसी प्रकार की कोई परेशानी होती है, तो इसकी शिकायत दर्ज करने के लिए बसों में कोई शिकायत पुस्तिका भी नहीं है। वहीं अगर कोई सुझाव भी देना चाहे, तो इसके लिए कोई शिकायत पेटी भी नहीं है। इसके अलावा जब कोई यात्री किसी चीज को लेकर शिकायत करना चाहता है, तो उसका सही ढंग से रिस्पांस तक नहीं मिलता।
बसों में फर्स्ट एड बॉक्स होना बेहद जरूरी है

बसों में इस प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध होना बहुत जरूरी है, ताकि अगर कोई हादसा हो तो मौके पर ही यात्रियों को फर्स्ट एड दिया सके। वहीं इसके बारे में कंडक्टरों को भी पूरी जानकारी होनी चाहिए। अगर कंडक्टरों को फर्स्ट एड के बारे में पूरी जानकारी रहेगी, हो तो हादसों के दौरान होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।- नरेशपठानिया, फर्स्ट एड ट्रेनर