बठिंडा. आर्मीका एक पूर्व अफसर 4 सालों से इंसाफ के लिये भटक रहे हैं। मगर आज तक उन्हें न्याय नहीं मिला। पीड़ित अफसर कई बार उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई परंतु उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार चारों ओर से ने निराश-हताश होकर उन्होंने ने प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के दरबार में इंसाफ मांगा है
बठिंडा के बाबा फरीद नगर में रहने वाला बलदेव सिंह जोशी सेना का पूर्व अधिकारी हैं। 11 दिसंबर 2009 को उनके पड़ोसी सुखवीर सिंह ने बलदेव सिंह उनके बेटे के खिलाफ थाना सिविल लाइन में एक मामला दर्ज करवाया था। परंतु पुलिस मामले में बठिंडा की सीजेएम कोर्ट में 3 साल तक कोई चालान नहीं पेश कर पाई। इसी बीच बलदेव सिंह ने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिये एक दरखास्त पंजाब मानवाधिकार आयोग चंडीगढ़ के एडिश्नल डायरेक्टर जनरल को दी थी। जांच मानवाधिकार आयोग के डीएसपी रणजीत सिंह ने की। जांच में तकनीकी कारणों के चलते मामले को निराधार बताते हुए थाना कोतवाली बठिंडा को मामला रद्द करने की सिफारिश कर दी थी।
इसके बाद पुलिस ने बठिंडा की सीजेएम कोर्ट में मामले की कैंसिलेशन फाइल कर दी। सीजेएम रमन कुमार की अदालत ने 13 फरवरी 2014 को कैंसिलेशन रिपोर्ट को मंजूर कर लिया था। इसके बाद बलदेव सिंह उनके बेटे के खिलाफ मामला खारिज हो गया। इसके बाद बलदेव सिंह ने उनके उनके बेटे के खिलाफ झूठी निराधार शिकायत देने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिये एसएसपी बठिंडा को एक शिकायत दर्ज करवाई। अपनी शिकायत मे पीड़ित का आरोप था कि बिना किसी जांच के उनके उनके बेटे के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया। इतना ही नहीं पुलिस ने इस मामले में 3 साल तक चालान क्यों नहीं पेश किया। पीड़ित के अनुसार जब उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर अदालत द्वारा कैंसल कर दी गई बावजूद इसके झूठी शिकायत देने
वाले के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज क्यों नहीं किया।
इंसाफ ना मिलने से आहत पीड़ित बलदेव सिंह ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को दरख्वास्त देकर पूरे मामले में पुलिस द्वारा झूठा मामला दर्ज करने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।