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लेखकों को गहन अध्ययन करने की जरूरत

7 वर्ष पहले
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पंजाबीसाहित्य सभा बठिंडा की मासिक बैठक केंद्रीय पंजाबी लेखक सभा के प्रधान डॉ.लाभ सिंह खीवा, डॉ.अजीतपाल सिंह,साहित्य सभा के प्रधान जसपाल मानखेड़ा के प्रधानगी मंडल में आयोजित की गई।

इसका संचालन महासचिव रनजीत गौरव द्वारा किया गया। सभा द्वारा 21 दिसंबर को भाषा विभाग पंजाब के सहयोग से आयोजित किए जाने वाले साहित्यक समागम पर विचार चर्चा की गई। रचनाओं के दौर में मंगत कुलजिंद,मलकीत मीत,डॉ.नीतू अरोड़ा,अमन दातेवासिया,सेवक शमीरिया,बाबू राम कमल,सुरिंद्रप्रीत घनिया ने अपनी रचनाएं पेश की। डॉ.अजीतपाल सिंह ने अपनी वार्तिक रचना पेश की।

इन रचनाओं पर विचार पेश करते हुए डॉ.नीतू अरोड़ा ने कहा कि लेखकों को कुछ समय के लिए लिखना स्थगित करके अध्ययन करना चाहिए।उनको संसार प्रसिद्ध रचनाओं को जरूर पढ़ना चाहिए। पंजाबी कवयित्रियों की मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि वो मानवी संवेदना,लोग हितों से लिखना शुरु करके अंत अध्यात्म की ओर चली गई। अमृता प्रीतम,मनजीत टीवाना,पाल कौर,भुपिंद्रप्रीत की कविताओं की उद्धाहरनें देकर उन्होंने सवाल किया कि ये एैसा क्यों है ? डॉ.लाभ सिंह खीवा,प्रिंसिपल जगदीश घई,जसपाल मानखेड़ा ने भी इन रचनाओं पर अपनी विचार पेश किए। बैठक मेंं तेजा सिंह प्रेमी,जरनैल भाईरूपा,सुखदेव मान आदि मौजूद थे।