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माईसरखाना मंदिर में मेला आज माता के दर्शनों को पहुंचे श्रद्धालु

7 वर्ष पहले
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भक्तोंसे अपने वादे के अनुसार छठे नवरात्रा पर मां भगवती इस बार 30 सितंबर को माइसरखाना आएंगी। उनके स्वागत को लाखों श्रद्धालु उमड़ेंगे। यहां से 30 किमी दूर प्राचीन श्री दुर्गा मंदिर में साल में चैत्र एवं आश्विन महीनों के नवरात्रा की षष्ठी तिथि पर भारी मेला लगता है। मान्यता है कि छठे नवरात्रे को मां भगवती अपने भक्तों को माइसरखाना में दर्शन देती है और पूजा-भेंट ग्रहण करती है।

षष्ठी मेला में बठिंडा ही नहीं, बल्कि उत्तर भारत के प्रमुख नगरों से पांच लाख से अधिक लोग नवरात्रा उत्सव में हिस्सा लेते हैं। मेले से पूर्व की रात महामाई के जागरण में गुजरती है, जबकि सुबह चार बजे से ही दर्शन को लाइनें लग जाती हैं। मेला प्रबंधक सनातन धर्म महावीर दल के प्रबंधकों की ओर से सफाई, पानी, ठहरने समेत तमाम प्रबंध मुकम्मल कर लिए गए हैं। मंदिर प्रांगण में जोत रूप में दर्शन देने वाली मां जगदंबा को इत्मीनान से हर कोई माथा टेक सके, इसके लिए भीड़ नियंत्रण से लेकर अन्य प्रबंधों में लगभग छह सौ कार्यकर्ता सेवा देंगे। दर्जन भर सीसीटीवी कैमरे चप्पे-चप्पे की खबर रखेंगे। मंदिर को भव्य ढंग से फूलों और बिजली की लड़ियों से सजाया गया है। प्रशासन की ओर से यातायात एवं सुरक्षा के भी कड़े प्रबंध किए गए हैं, वाहन डेढ़ किमी दूर मेन सड़क पर ही रोके जाएंगे। लंगर लगाने वालों के लिए भी मंदिर से दूरी पर प्रबंध किए गए हैं।

कमालूभक्त के अनुरोध को मां ने किया था स्वीकार

दंतकथा के अनुसार 1515 ई. पूर्व यहां पर रहते किसान बाबू कमालू दास नथाना वाले बाबा कालूराम के शिष्य थे। कमालू भक्त प्रत्येक बरस अपने गुरु के साथ ज्वाला जी जाया करते थे। बुजुर्ग होने पर हिम्मत नहीं रही, फिर भी जैसे-तैसे वे वहां गए और फरियाद लगाई कि हे माता इस बार तो बड़ी मुश्किल से तेरे दरबार गया, हो सकता है कि अगले साल सकूं, अच्छा हो कि मेरे गांव में ही दर्शन दे दिया करो। उनकी अपार श्रद्धा भक्ति देख ज्वाला जी की जोत में माता ने दर्शन दिए और गांव में मंदिर बनाने को कहा। साथ ही आशीर्वाद दिया कि चैत्र शारदीय नवरात्रा की छठ वाले दिन माइसरखाना के मंदिर की जोत में माता का प्रकाश आएगा। इस जोत के दर्शन से श्रद्धालुओं को ज्वाला जी धाम के समान फल और इच्छापूर्ति भी होगी। गांव वालों ने कमालू भक्त के सहयोग से मंदिर बनवाया और मंदिर धीरे-धीरे प्रसिद्ध हुआ।

पौराणिक मान्य