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बठिंडा में भूजल का स्तर 93 फीसदी गिरा, हालत चिंताजनक

7 वर्ष पहले
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बठिंडा। जिले में भूजल का स्तर बड़ी तेजी से नीचे जा रहा है। पिछले दस सालों के दरम्यान जलस्तर बड़ी तेजी से नीचे गिरा है। बठिंडा जिले के आठ ब्लॉकों में से पांच की हालत चिंताजनक है। इसके दो बड़े कारण माने जा रहे हैं कि एक तो रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का लागू नहीं होना और दूसरा है ट्यूबवेलों के जरिये खेती में ग्रांउड वाटर का अंधाधुंध इस्तेमाल।
खेतीबाड़ी विभाग द्वारा जल स्तर के पेश आंकड़े बहुत चिंताजनक है। बठिंडा में भूजल का स्तर 93 फीसदी नीचे चला गया है। बठिंडा के अगर ब्लॉकों की बात करें तो भगता रामपुरा ब्लॉक की हालत सबसे ज्यादा खतरनाक है। भगता ब्लॉक में पिछले दस सालों में 7.05 मीटर नीचे चल गया है जबकि रामपुरा का पानी 10 मीटर नीचे चला गया है। जिले में कुल आठ ब्लॉक में से तीन ही ब्लॉक सेफ हैं, जबकि बाकी के पांच ब्लॉक अनसेफ हैं।
बठिंडा के ब्लॉकों में भूजल स्तर की स्थिति

ब्लॉकजून 2004 जून 2014 ग्रांउड वाटर डेवलपमेंट कैटेगरी
बठिंडा 11.80 16.35 मीटर 75 फीसदी सेफ
संगत 10 8.80 मीटर 44 फीसदी सेफ
तलवंडी साबो 8.45 10 मीटर 48 फीसदी सेफ
नथाना 12.85 19.50 मीटर 103 फीसदी चिंताजनक
फूल 13.41 22.75 मीटर 177 फीसदी चिंताजनक
भगता 12.60 19.65 मीटर 177 फीसदी चिंताजनक
रामपुरा 12.60 22.20 मीटर 110 फीसदी चिंताजनक
मौड़ 10.10 13.75 मीटर 114 फीसदी चिंताजनक
बठिंडा जिला 13.41 22.75 मीटर 93 फीसदी चिंताजनक

ट्यूबवेल पर निर्भर है सिंचाई : बठिंडा में फसलों की सिंचाई 73 फीसदी ट्यूबवेलों पर निर्भर है। सिर्फ 27 फीसदी रकबा ही नहरी पानी के अधीन है। पंजाब के खेतीबाड़ी विभाग के डॉयरेक्टर मंगल सिंह संधू ने भी इस बात को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि जलस्तर का लगातर गिरना चिंता का विषय है। अगर ऐसा ही होता रहा तो आगे नुकसान हो सकता है।

संगत में आया सुधार : सरकारी आंकड़े बताते हैं कि संगत ब्लॉक में भूजल स्तर में सुधार आया है। ये जिले का एकमात्र ऐसा ब्लॉक है, जिसके जल स्तर में सुधार हुआ है। यहां सवा मीटर पानी ऊपर आया है, जबकि बाकी के सभी ब्लॉकों में पानी का स्तर नीचे चला गया है।

कम हो रही है बरसात | कम बरसात भी भूजल स्तर गिरने की एक वजह है। पिछले कुछ सालों के दौरान बरसात पहले के मुकाबले काफी कम हुई है। साल 2007 में 791 एमएम बारिश बठिंडा में हुई थी। इसके बाद फिर कभी भी पांच साढ़े पांच सौ एमएम से बरसात ज्यादा नहीं हुई।

जनवरी 2009 में लोकल बॉडी ने नगर निगम को 200 गज से बड़ी कॉमर्शियल इमारतों के लिए रेन हार्वेस्टर सिस्टम लागू किया था। इसके लिए नगर निगम ने हिदायत जारी की थी कि किसी भी कॉमर्शियल इमारत का नक्शा तब तक पास नहीं हो सकता, जब तक उसमें रेनवाटर हार्वेस्टर सिस्टम का प्रोविजन हो। इसके अलावा तब तक कंप्लीशन सर्टिफिकेट दिया जाए, जब तक उसमें वाटर हार्वेस्टर सिस्टम को स्थापित नहीं किया जाए। लेकिन हालत ये है कि एक आध इमारत को छोड़कर किसी भी इमारत में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं है। और तो और किसी भी सरकारी बिल्डिंग में भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाया गया।