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गुरु की शरण में जाने से परमात्मा पर विश्वास होगा स्थिर: वैष्णवी

4 वर्ष पहले
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युवापरिवार सेवा समिति की ओर से डॉ. मेला रोड शक्ति नगर के खुले पंडाल में करवाई जा रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार की देर शाम तक श्रद्धालु मस्ती में झूमे। श्याम की मस्ती में सुध-बुध खोकर श्रद्धालुओं ने जमकर फूलों की होली खेली। मुख्य यजमान विनोद गोयल, सतीश कुमार बब्बू, सुरेश कुमार डेनी, पुरुषोत्तम लाल ने विधिवत पूजन करवाकर कथा का रसपान किया। वहीं सतीश अरोड़ा, डॉ. एसके बांसल, उषा बांसल, राजकुमार नंबरदार, एसके बांसल, विजय गोयल, गिरीश अरोड़ा ने आरती करवाई।

आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सुश्री वैष्णवी भारती जी ने प्रहलाद प्रसंग के माध्यम से भक्त और भगवान के संबंध का बेहद प्रभावशाली अंदाज से मार्मिक चित्रण किया। उन्होंने बताया कि भगवान अपने भक्त की पीड़ा अथवा तड़प बर्दाश्त नहीं कर सकते और भक्त की एक पुकार पर दौड़े चले आते हैं। भगवान के प्रति अटूट विश्वास की बदौलत प्रहलाद ने प्रभु भक्ति में डूबकर खुद को उसके समर्पित कर दिया जिसकी बदौलत संकट की हर घड़ी में प्रभु को अपने साथ पाया।

साध्वी ने फरमाया कि प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप ने उसे पहाड़ से नीचे फिंकवाया, मस्त हाथी के आगे डाला लेकिन प्रह्लाद भक्ति मार्ग से विचलित हुए। भक्त प्रहलाद की तरह विपदा या मुसीबत भक्त के जीवन को निखारने के लिए आते हैं। सदगुरु की शरण में जाने पर आत्मज्ञान को प्राप्त करने के बाद ही हमारा स्वयं पर और परमात्मा पर विश्वास स्थिर होता है। फिर इस साहस से उपजता है। इसलिए जिस भी सफलता को हम प्राप्त करना चाहते हैं, उसका आधार ही आत्मविश्वास है जोकि केवल आत्मज्ञान से ही संभव है।

कथा व्यास साध्वी वैष्णवी भारती का सम्मान करते श्रद्धालु।

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