प्रेम भगवान की एक शक्ति का नाम
श्रीश्यामा श्याम सेवा समिति की ओर से हरपाल नगर गीता भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज की प्रचारिका ब्रज भुवनेश्वरी देवी जी ने प्रवचनों की अमृतवर्षा करते हुए कहा कि प्रेम भगवान की एक शक्ति का नाम है। उन्होंने फरमाया कि यह प्रेम रसिक कृपा से ही प्राप्त हो सकता है और यह प्रेम केवल रसिक संत और भगवान के पास है। संसार में तो सब माया के अंदर है, इसलिए हमारे पास तो यह प्रेम किसी के पास हो ही नहीं सकता।
उन्होंने बताया कि वो मेरे हैं और मैं उनका हूं। इन दोनों में हमें एक तो अपनाना है। इन दोनों भाव में जो श्रेष्ठ है, वो मेरा है। जब तक यह भाव आपके हृदय में नहीं आएगा, तब तक भगवान नहीं मिल सकते। यदि यह भाव वे ही मेरे हैं, आपके मन में बैठ जाए, तो किसी साधना की जरूरत नहीं रह जाती। उन्होंने कहा कि हम तो सब व्यापारी हैं, प्रेम की परिभाषा ही नहीं समझते। भगवान तो आपके अंदर बैठे हैं, अगर भगवान का प्यार चाहिए तो भगवान से प्यार करना पड़ेगा। प्यार कामना और गुण रहित होता है। महाराज जी ने बड़े सुंदर शब्दों में लिखा है, ये आंसू, ये दर्द, ये आहें, किस मुख से कहूं इश्क में आदाब नहीं।
उन्होंने कहा कि यह मनुष्य शरीर बहुत मुश्किल से मिला है। इसलिए श्रीकृष्ण से इस भाव से प्रेम करो कि वे ही मेरे हैं। प्रवचन श्रृंखला का प्रारंभ मनीश बांसल, संजीव वर्मा, डॉ. राकेश गोयल, सुरिंदर सिंगला, राजीव हैप्पी, प्रेम चंद मानस, गुरप्रीत सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर भुवनेश्वरी देवी जी ने आजा प्यारे प्राण हमारे, आजा वृंदावन भजन गाकर भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हरपाल नगर के गीता भवन में प्रवचन देती हुई भुवनेश्वरी देवी जी।