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फाइलों मे सिमटी पुलिस की योजनाएं, शहर में बढ़ा क्राइम का ग्राफ
क्राइमकंट्रोल करने के लिए पुलिस की योजनाएं फाइलों में ही सिमट कर रह गई हैं। इस कारण शहर में ग्राफ का लगातार बढ़ रहा है। अगर इस ग्राफ को बढ़ने से रोकना है तो पुलिस को अपनी योजनाओं को हर हालात में सिरे चढ़ाना ही होगा। असल में जिस योजना को जिस अधिकारी ने शुरू किया, कुछ समय बाद उनका तबादला हो जाता है। ऐसे में उस अधिकारी के जाते ही उसके द्वारा शुरू की गई योजना भी ठप हो जाती है।
सीसीटीवीकैमरे खराब : पुलिसने करीब 4 साल पहले जिले के सभी थानों मे सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे। इसका मकसद था कि जिला पुलिस प्रमुख थानों मे आने वाले पीड़ितों के साथ पुलिस द्वारा किये जा रहे व्यवहार का पता लगा सकें। योजना तत्कालीन एसएसपी सुखचैन सिंह गिल के समय में बनी थी। इस योजना को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्किंग एंड सिस्टम के माध्यम से जोड़ा जाना था। मगर कैमरे थानों मे लगे लगे खराब हो गये। आज उनका नामोनिशान नहीं है।
ईबीटयोजना भी बंद : पुलिसको आधुनिक बनाने के लिये ईबीट सिस्टम चलाया गया था। इसके लिए जिले के चार थानों मे विशेष मोबाइल सेट दिए गए थे। थाने में आने वाली काॅल या बीट जिसका प्रभारी एसआई एएसआई होता थाए को ये फोन दिए गए थे। इनमें विशेष तौर पर वीडियो बनाने फोटोग्राफी की सुविधा थी। ताकि बीट प्रभारी इसकी सूचना वीडियो फोटो के साथ पीसीआर कार्यालय मे दे सकें। योजना भी फेल हुई और सेट का पता नहीं कहां चले गये।
एसपीओभी छोड़ गए : पुलिसने शहर में बीडीए के सहयोग से एसपीओ की तैनाती की थी। जिन्हें टॉर्च, डंडा और विशेष वर्दी के साथ मैदान में उतारा गया था। वह एसपीओ अपने इलाके में गश्त करते थे और किसी घटना की सूचना पुलिस को देते थे। मगर यह योजना उन्हें वेतन नहीं मिलने कारण बंद करनी पड़ी थी। योजना उस समय के एसएसपी नौनिहाल सिंह ने शुरू की थी। जो उनके तबादले के बाद बंद हो गई।
लुटेरेपकड़ने की योजना ठंडे बस्ते में : जिलेके पूर्व एसपी सिटी नरिंद्र सिंह घई ने शहर के रिक्शा चालकों को साथ लेकर योजना बनाई थी। इसमें रिक्शा चालकों की क्लासें लगाई गई थीं और उन्हें बताया गया था कि वे लूट की वारदात के समय विशेष रूप से जब किसी महिला से लूट की घटना होने पर वे लूट की वारदात करने वालों का हुलिया याद रखेंगें। इसके अलावा लुटेरों का वाहन नंबर भी याद रखेंगें। जब अधिकारी की बदली हुई तो योजना भी ठंडी पड़ गई।
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