अपनों से सियासत, इसीलिए हो रही है बगावत
चारोंप्रमुख पार्टियों में टिकटों के आवंटन के समय स्थानीय गुटबाजी के कारण आपनो से नेता सियास्त खेलते रहे जो पार्टी में बगावत का कारण बन गई। इसका ज्यादा नुकसान भाजपा और कांग्रेस को हुआ, जिससे कांग्रेस पीपीपी का एलायंस खतरे में पड़ गया और शिअद-भाजपा गठबंधन के लिए परेशानियां खड़ी हो गई।
अब आने वाले दिनों में देखना होगा कि िनगम चुनाव में सियासत कैसे कैसे रंग बदलती है। िशअद, भाजपा और कांग्रेस से बगावत कर खड़े हुए आजाद उम्मीदवार इस बार निगम चुनाव में समीकरण बदल सकते हैं।
पंजाब पीपल्स पार्टी| पीपीपीकांग्रेस की आपसी फूट का शिकार हो गई। पीपीपी को अंतिम समय तक सीटों का ही तय नहीं हो पाया कि कांग्रेस कितनी देगी। ऐसे में पीपीपी ने जो प्रत्याशी घोषित किए उनमें से भी वार्ड नंबर 46 से एक को बदलना पड़ा। अब जो चुनाव मैदान में हैं उनके साथ तो कांग्रेस है, और अपनी पार्टी भी असमंजस में है कि उनका साथ दे या एलायंस तोड़े। हालांकि मनप्रीत कह चुके हैं जो दोनों दलों के प्रत्याशी आमने-सामने होंेगे वे वहां प्रचार नहीं करेंगे।
शिरोमणि अकाली दल| शिअदने टिकटों का आवंटन करते समय जीते हुए पार्षदों के भी टिकट काट दिए। इससे पूर्व पार्षद टेक सिंह खालसा और मनजीत सिंह शिअद से बागी होकर कांग्रेस में चले गए। वार्ड और सर्कल स्तर के नेताओं को भी जब उम्मीद के मुताबिक टिकटे नहीं मिली तो उन्होंने आजाद नामांकन दाखिल कर दिए।
भाजपा | भाजपामें शहरी स्तर पर 4 धड़े होने से केवल जीते हुए पार्षदों के टिकट काट दिए गए, बल्कि वरिष्ठ नेताओं को भी टिकट नहीं मिली। वार्ड 26 से प्रभारी पार्षद कृष्ण गर्ग और भाजपा नेता राजेश नोनी की प|ियों को आवेदन के बावजूद टिकट नहीं मिला। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट पूर्व चेयरमैन मोहन लाल गर्ग और भाजपा नेता डा. शिव दत्त गुप्ता दोनों की प|ियों को वार्ड नंबर 23 से टिकट के लिए नजरअंदाज कर रचना ओवराय को टिकट दे दिया गया। वार्ड नंबर 35 से भाजयुमो के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य संजय विसवाल तक की टिकट काटकर कुछ माह पहले पार्टी में आए अर्जुन को टिकट दे दी, जिससे यह भी पार्टी रिजाइन कर बागी हो गए। खुद भाजपा शहरी प्रधान परमिंदर गोयल के वार्ड में उनका नाम भी टिकट के लिए पैनल में था, मगर उन्हें भी टिकट नहीं दी गई।
कांग्रेस | कांग्रेसके बठिंडा प्रभारी विधायक अजीतइंद्र सिंह मोफर प्रदेश कांग्रेस महासचिव हरमंदर जस्सी ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस कर पीपीपी से एलायंस की बात की। 7 सीटें पीपीपी को और 43 कांग्रेस को दी। मगर कांग्रेस में जस्सी गुट ने जगरूप गिल गुट के नेताओं के वार्ड पीपीपी को अलॉट कर दिए। इधर, मंगलवार की शाम पीपीपी के उपप्रधान हरविंदर लाड़ी ने प्रेस कांफ्रेंस कर पीपीपी के 7 वार्डों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए। बुधवार को नामांकन का अंतिम दिन होने के बावजूद कांग्रेस ने मंगलवार देर रात तक प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं की। जगरूप गिल उनके समर्थकों को जब इसका पता चला तो उन्होंने पीपीपी अध्यक्ष मनप्रीत बादल से संपर्क किया। कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों को तो सूचित कर दिया, उनकी सूची स्थानीय स्तर पर मीडिया को बुधवार को नाकांकन का समय पूरा होने के बाद जारी की।