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अध्यापकों पर शिक्षा विभाग अब रखेगी पैनी नजर

6 वर्ष पहले
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अध्यापकोंकी फरलो एवं ड्यूटी समय में एंज्वाय की प्रवृत्ति पर शिक्षा विभाग की पैनी निगाह है। अध्यापकों के इस आदत में सुधार लाने के लिए विभाग ने गाइड लाइन जारी किया है। ताकि अध्यापकों का ज्यादा से ज्यादा समय बच्चों की पढ़ाई में लग सके। जिला शिक्षा अधिकारियों को इन नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की हिदायत दी गई है।

डीपीआई सेकंडरी बलबीर सिंह ने चार्ज लेने के साथ ही शिक्षा सुधार की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। उनके अनुसार अध्यापक मौका पाकर स्कूलों से खिसक लेते हैं, वहीं अध्यापक के छुट्टी पर होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, जिसके लिए कोई गंभीर नहीं होता। इसके अलावा अपनी सुविधानुसार स्कूलों में नियम बना लिए जाते हैं। डीपीआई सेकंडरी ने अध्यापकों के अपनी ड्यूटी से बचने की पैंतरेबाजी पर नकेल डालने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं।

> स्कूल मुखी, अध्यापक अथवा कर्मचारी स्कूल समय में किसी काम के बहाने से बाहर जाएं। आने-जाने के बारे विस्तृत लिखा जाए। इस पर स्कूल मुखी के हस्ताक्षर हों जबकि इस रजिस्टर के कागजों की संख्या संबंधित स्कूल मुखी की ओर से तस्दीक की जाए।

> अध्यापक के छुट्टी पर होने की सूरत में उसके पीरियड एडजस्ट किए जाएं, कोशिश की जाए कि संबंधित कक्षा को पढ़ाने वाले अन्य अध्यापक का भी पीरियड एडजस्ट किया जाए और इस बारे में एडजस्ट किए अध्यापक को पीरियड के बारे में पूरी जानकारी समय पर दी जाए। किसी भी हालत में दो कक्षाएं इकट्ठा लगाई जाएं।

> कक्षाएं कमरों में ही लगाई जाएं और किसी हालत में बाहर खुले आसमान तले कक्षाएं लगाएं।

> फाइनल एग्जाम के फरवरी-मार्च महीने में आकस्मिक छुट्टी लेने से गुरेज हो और आकस्मिक छुट्टियों का संतुलन यकीनी बनाया जाए। हाजिरी रजिस्टर में अध्यापक-कर्मचारियों द्वारा ली गई हरेक छुट्टी दर्ज हो, वहीं 25 प्रतिशत से ज्यादा अध्यापकों को कोई छ़ुट्टी दी जाए।

>सरकार अथवा विभागीय हिदायतों के अनुरूप सुबह की सभा, आधी छुट्टी अथवा पीरियड का समय निश्चित किया जाए, अपने तौर पर इसमें फेरबदल किसी हालत में किया जाए।

> स्कूल मुखी अपने अधीनस्थ अध्यापकों कर्मचारियों को स्कूल में खाली पदों की लिखित तौर पर दें, खाली पदों की संख्या डीईओ ही उच्च अधिकारियों को भेजेगा।

> स्कूल समय के दौरान अध्यापक मोबाइल फोन पर सोशल साइट्स, वाट्स अप के इस्तेमाल से गुरेज करें, कक्षा में पढ़ाते समय मोबाइल फोन स्विच आफ होना चाहिए।

> बोर्ड अथवा हाउस टेस्ट के दौरान स्कूलों में नकल पर नकेल कसने के प्रति गंभीरता दिखाई जाए और पेपरों को नकल रहित बनाया जाए।