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डीटीओ दफ्तर के कोने-कोने में दलाली का खेल

7 वर्ष पहले
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(कमरा नंबर 114 नंबर से बाहर आते हुए एक दलाल।)
बठिंडा | जिला प्रबंधकीय कॉम्प्लेक्स में जिला परिवहन अफसर के दफ्तर में दलालों का राज है। जहां अहम सरकारी रिकॉर्ड रखा है, वहां प्राइवेट लोगों की पहुंच है। कई घोटाले होने के बाद भी अफसर अलर्ट नहीं हुए हैं। आरसी बनवानी हो या फिर डीएल की फाइल हो, दलालों के बिना काम हो नहीं पाता है। ऐसे में खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ता है, जो अपने स्तर पर काम करवाने के लिए आते हैं। उनके काम अटके रहते हैं और दलालों के काम आसानी से एक झटके में हो जाते हैं। बुधवार को दैनिक भास्कर टीम ने डीटीआे दफ्तर का दौरा कर लोगों की दिक्कतों को जाना।
दफ्तरमें मौजूद लोगों ने दफ्तर के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप भी लगाए : भास्करटीम 11.12 बजे डीटीओ दफ्तर पहुंची। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वालों की भीड़ लगी हुई थी। काफी शोर मच रिहा था। भदौड़ के रहने वाले प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने गाड़ी की आरसी बनवानी थी।
दो महीने हो गए। लेकिन आरसी नहीं मिल रही। जीरो नंबर काउंटर पर जाते हैं तो वो कहते हैं 109 नंबर रूम में जाओ। 109 नंबर रूम में जाते हैं तो बोल देते हैं कि एडीटीओ के पास जाओ।
उनके पास गए तो उन्होंने कहा कि अभी तक फाइल उनके पास नहीं पहुंची। फिर पता चला कि जो डीलिंग हैंड व्यक्ति है उनकी डयूटी आज फरीदकोट में है और कल को भी नहीं मिलेगा क्योंकि कल को वो मलोट में होगा। टीम को दफ्तर में आते देख गांव महमा सवाई का एक युवक सर्वजीत टीम के पास आया अौर उन्होंने डीटीओ दफ्तर के दो कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्हांेने कहा कि आमजनता को केवल चक्कर कटवाए जाते हैं।
लोगोंके लिए वर्जित क्षेत्र, दलालों को छूट : रूमनंबर 109 में डीटीओ के द्वारा गेट पर वर्जित क्षेत्र लिखा हुआ है। वहां पर आम लोग जा नहीं सकते। जबकि दलालों के लिए कोई रोक टोक नहीं है। दलाल सरेआम इस रूम में जा रहे थे। अकेले बठिंडा के ही नहीं बल्कि फरीदकोट के दलाल भी वहां पर घूमते हुए दिखाई दिए।

''ड्राइविंग लाइसेंस के लिए फॉर्म लेने लगा तो दलाल मेरे पास आया कि अगर आप लाइसेंस सीधे तौर पर बनाओगे तो 2 महीनों तक परेशान होना पड़ेगा और 10 चक्कर भी गलाने पड़ेंगे। 2000 रुपये लगेंगे और सारा काम हो जाएगा।'' कुलविंदर सिंह,वासी गांवभैणी।

''मुझे जान बूझ कर तीन बार ड्राइविंग लाइसेंस के टेस्ट से फेल कर दिया गया। अब अंतिम चांस बचा है। मुझसे टेस्ट लेने वाले कर्मचारी ने 500 रुपए की मांग की। मेरे पास नहीं थे। मैंने नहीं दिए। बाहर आया तो पियोन ने 300 में टेस्ट पास कराने की बात कही। मैं गरीब हूं। मैं कहां से इतने पैसे दूं।'' सर्वजीत सिंह, वासी,महमा सवाई ।

सरकारी रिकॉर्ड को रौंदा पैरों तले : पहले ही डीटीओ दफ्तर का काफी रिकॉर्ड गुम हो चुका है। इस संबंध में मामला भी दर्ज कराया जा चुका है। इसके बावजूद विभाग रिकॉर्ड के प्रति गंभीर नहीं है और रिकॉर्ड को पैरों तले रोंदा जा रहा है। बुधवार को टीम ने देखा कि रूम नंबर 109 में कैबिन के बाहर रिकॉर्ड को वैसे ही फैंक रखा है और लोग उसके ऊपर चढ़ रहे हैं। लेकिन विभाग के कर्मचारियों को कोई परवाह नहीं है।
सीधी बात : लतीफ अहमद, डीटीओ, बठिंडा
आपके दफ्तर के कर्मचारियों पर लोगों के द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। आपका क्या कहना है?
किसनेलगाए हैं ? मेरे पास तो कोई भी शिकायत लेकर नहीं आया।
आपकेपास तो पता नहीं लेकिन हमारे पास जरूर आए थे।?
तोआप मेरे पास ले आते
माफकरना श्रीमान जी, ये मेरी डयूटी नहीं है। आप ये बताओ कि भ्रष्टाचार के बारे में आपका क्या कहना है ?
मैंकल को दफ्तर पहुंच कर मामले की पड़ताल करूंगा।
दफ्तरके वर्जित क्षेत्र में दलाल सरेआम घूमते रहते हैं। जबकि आम लोगों को मनाही है। ऐसा क्यों ?
मैं चेक करा लेता हूं कि कौन सा दलाल कहां आता है।