खडूर साहिब में 24 साल बाद हुई इतनी कम वोटिंग
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बॉयकॉट का असर खडूर साहिब उपचुनाव पर पड़ा। शनिवार को अधिकांश पोलिंग बूथ बेरौनक दिखे। गोइंदवाल के बूथ नंबर 180 में सुबह 10 बजे तक कोई वोट डालने ही नहीं आया। कई पोलिंग स्टेशनों पर चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के पोलिंग एजेंट भी नदारद रहे। शाम को 58 फीसदी पोलिंग का ऐलान हुआ जोकि 24 साल में सबसे कम है। इससे पहले 1992 में इतनी कम वोटिंग हुई थी। 58 फीसदी वोटिंग पर भी सवाल उठने लगे हैं। बेअदबी कांड के बाद इस्तीफा देने वाले पूर्व विधायक रमनजीत सिंह सिक्की ने आरोप लगाया है कि सत्ता पक्ष ने फर्जी वोटिंग करवाई है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल के सेक्रेटरी डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने पोलिंग पर संतोष जताते हुए कहा कि जिन नेताओं ने वोटर्स से चुनाव का बहिष्कार करने की बात की थी, जनता ने उनको ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा कि लोगों ने डेवलपमेंट के एजेंडे पर वोट किया है। वोटों की गिनती 16 फरवरी को होगी। चुनाव परिणाम भी इसी दिन घोषित कर दिया जाएगा।
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{कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का चुनावी मैदान छोड़ना बड़ा कारण रहा।
{विपक्ष द्वारा लोगों को वोट करने की सलाह देना और कुछ ग्रुप्स द्वारा नोटा का बटन दबाने के लिए कहना।
{सूबे के कई हिस्सों में श्री गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी के सभी आरोपियों की गिरफ्तारी होना।
{बहबलकलां में गोलीकांड के आरोपी पुलिसवालों पर कार्रवाई होने के कारण सत्तारूढ़ दल से नाराजगी।
इन्द्रप्रीत सिंह, चंडीगढ़| शिरोमणिअकाली दल की तमाम कोशिशों के बावजूद खडूर साहिब में मतदान 60 फीसदी पार नहीं कर सका। मतदान का रुझान इतना कम था कि यदि अकाली दल के कार्यकर्ता लोगों को ट्राॅलियों और कारों में भरकर लाते तो आंकड़ा शायद 50 फीसदी भी पार करता। खडूर साहिब में 1997 में 72 फीसदी, 2007 में 74.84 फीसदी और 2012 में 80 फीसदी वोट पड़े थे।
3 उम्मीदवार भी नहीं डाल पाए वोट| आजादउम्मीदवार डाॅ. सुमेल सिंह का वोट बठिंडा में है और आजाद उम्मीदवार आनंतजीत सिंह संधू का अमृतसर रोड एरिया में। वहीं आजाद उम्मीदवार सुखदेव सिंह खौसला का वोट गांव दियालपुर जिला कपूरथला में है। तीनों उम्मीदवार अपना वोट भी नहीं डाल पाए।
तरनतारन| कस्बाफतेहाबाद में खाली पोलिंग स्टेशन। (दाएं) गांव बाणियां के पोलिंग बूथ में सुस्ताता पुलिस मुलाजिम। दोपहरबाद पोलिंग में कुछ तेजी आई।
1992 में आतंकवाद का बोलबाला था। तब शिरोमणि अकाली दल ने चुनाव का बॉयकॉट किया था। कई उम्मीदवार बिना मुकाबला जीते थे। पूरे सूबे में 8% वोट पड़े थे। 2012 के विधानसभा चुनाव में 80 और 2009, 2014 के लोकसभा चुनाव में 68 परसेंट वोट पड़े थे।