अपनी गलती छिपाने के लिए बीएंडआर विभाग ने दी गलत जानकारी
बीएंडआरविभाग बठिंडा ने अपनी गलती छुपाने के लिए आरटीआई एक्टिविस्ट को मांगी गई जानकारी सही नहीं दी।
इसके चलते आरटीआई एक्टिविस्ट ने स्टेट कमिश्नर आरटीआई को शिकायत भेजकर गलत जानकारी मुहैया करवाने वाले बीएंडआर बठिंडा के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मनोज शर्मा ने बताया कि उसने बीएंडआर विभाग बठिंडा से आरटीआई एक्ट 2005 के तहत साल 1991 से लेकर 2015 तक विभाग के अधीन आते सर्कलों/ मंडलों में उपमंडल क्लर्क, सीनियर सहायक सुपरिटेंडेंट की सीट पर कौन-कौन से कर्मचारी तैनात है, उनकी तैनाती के दफ्तरी आदेशों पत्रों की तस्दीकशुदा काॅपियां देने की मांग की थी। इसके साथ ही इसी समय के दौरान कौन-कौन से कर्मचारियों से अपनी ड्यूटी के साथ-साथ अन्य सीटों का काम लिया जा रहा है, उनके तैनाती के दफ्तरी आदेशों पत्रों की तस्दीक शुदा जानकारी मांगी थी। मनोज शर्मा ने बताया कि अधिकारियों ने खुद की गलती छुपाने के लिए उन्हें गलत जानकारी दी। मनोज शर्मा ने बताया कि उसके द्वारा मांगी गई आरटीआई का अगर विभाग सही जवाब देता है तो विभाग के कई अधिकारी कर्मचारी भ्रष्टाचार के आरोप में फंसते है। जिस कारण उसको विभाग द्वारा गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर जानकारी नहीं दी गई तो कमिश्नर से शिकायत करने के अलावा कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
25 साल तक नष्ट ही नहीं किया जा सकता रिकॉर्ड
जानकारीमें विभाग ने जवाब दिया कि सरकार की हिदायतों के अनुसार 2005 से पहले का रिकॉर्ड नष्ट कर दिया गया है। जिस कारण जानकारी नहीं दी जा सकती। मनोज ने बताया कि उन्होंने दोबारा जानकारी मांगी कि अगर रिकॉर्ड नष्ट किया गया है तो संबंधित अधिकारी से रिकॉर्ड नष्ट करने बाबत पत्र लिख कर अनुमति मांगी गई कॉपी दी जाए। उन्होंने कहा कि विभाग ने तो वह कॉपी मुहैया करवाई ही उसको 2005 के बाद का रिकॉर्ड मुहैया करवाया। जबकि कानून के मुताबिक रिकॉर्ड 25 साल तक नष्ट ही नहीं किया जा सकता।