बठिंडा। चुनाव के नजदीक केंद्रीय जांच एजेंसियों की तरफ से विभिन्न स्थानों में छापामारी करने का मामला राजनीतिक रंगत का कारण बनने लगा है। आयकर विभाग के साथ कस्टम विभाग सीबीआई की तरफ से बठिंडा में ज्वेलर और अस्पताल में की गई छापामारी देर रात तक जारी रही।
इस दौरान एक बात सामने आई कि अधिकतर प्रतिष्ठान ऐसे हैं जिनका आम आदमी पार्टी के साथ किसी किसी तरह से संबंध रहा हैं। बताया जाता है कि जिन संस्थानों पर इनकम टैक्स विभाग की टीम ने दबिश दी। उनके द्वारा पिछले लोक सभा चुनावों में आप उम्मीदवारों को अंदर खाते फंडिंग की गई थी। सूची में अधिकतर भट्ठा संचालक, महानगर के हॉस्पिटल, ज्वेलरी शॉप शिक्षण संस्थान शामिल हैं।
इन तमाम लोगों पर 20 फरवरी तक छापामारी की जाएगी। यहां बताना जरूरी है कि सिरसा के आयकर आयुक्त नितिन गर्ग के यहां छापामारी करने वाली सीबीआई की टीम ने 20 फरवरी तक आयुक्त काे बठिंडा में न्यायिक हिरासत ले रखा है इसके बाद वह नितिन गर्ग को पटियाला सीबीआई कोर्ट में लेकर जाएगी।
लुधियाना और जम्मू से पहुंची टीम
वीरवार सुबह करीब दस बजे आयकर विभाग लुधियाना के डिप्टी डायरेक्टर आदित्य शुक्ला और जम्मू कश्मीर रेंज के ज्वाइंट डायरेक्टर सतबीर सिंह की अगुआई में तीन टीमें बठिंडा पहुंची।
यह है मामला
शहर के प्रतिष्ठित राॅयल ज्वेलर्स और जिंदल हार्ट इंस्टीट्यूट में वीरवार को सीबीआई की टीम ने आयकर विभाग के साथ सुबह से लेकर शाम तक सर्च किया। आयकर विभाग के अनुसार आज दोनों संस्थानों में विभाग के रूटीन सर्वे नहीं बल्कि छापे पड़े हैं। ज्वेलर्स संजय जैन के घर की भी तलाशी ली गई। एक टीम ने मानसा में जिंदल हार्ट संस्थान के संचालक के परिजन के यहां पर भी दबिश दी। मानसा स्थित घर से कई महत्वपूर्ण कागजात को टीम ने कब्जे में लिया।
करोड़ों रुपए की राशि पर किया आयकर चोरी: आयकर विभाग
आयकर विभाग का कहना है कि बठिंडा में दोनों संस्थानों में करीब 24 करोड़ रुपए तक की राशि में आयकर चोरी हो सकती है। इसमें अस्पताल बाजार में संचालित राॅयल ज्वेलर में तो बिना बिल के सामान की खरीद करने जैसे मामले में सामने आए हैं जबकि जिंदल हार्ट संस्थान में मरीजों से मोटी राशि वसूलकर आॅपरेशन करने चिकित्सा सुविधा दी जा रही थी लेकिन इसका विवरण अकाउंट में करने की बजाय नीजि विवरण में ही रखा जाता था।
यही नहीं जिंदल हार्ट अस्पताल की तरफ से हाल ही में 10 करोड़ की लागत से खरीदी गई मशीन को लेकर भी सीबीआई कस्टम जांच में जुटा हुआ है। इस तरह से हर साल करोड़ों रुपए की आय होने के बावजूद विभाग को जानकारी नहीं दी जा रही थी, जो आयकर चोरी के मामले में शामिल होता है।