सभी छात्रों की होगी फ्लोरोसिस की जांच
जिलेके सभी सरकारी एडिड स्कूलों में पढऩे वाले छात्रों में फ्लोरोसिस की जांच सेहत विभाग की तरफ से की जाएगी। फ्लोरोसिस से बचाव कंट्रोल करने संबंधी भी सभी छात्रों को सेहत विभाग की टीम विस्तार से जानकारी देगी। छात्रों के दांत खराब हो इसके लिए विभाग एक विशेष ड्राइव की शुरुआत करने जा रहा है। स्कूल हेल्थ प्रोग्राम के तहत इस ड्राइव को चलाया जाएगा।
ग्राउंडवाटर नहीं है पीने लायक
शहरके जमीनी पानी में भी फ्लोरिस की मात्रा अधिक है। यही कारण है कि शहर भर में नगर निगम की तरफ से लगाए गए हैंड पंप को बंद कर दिया गया है। नगर निगम की तरफ से हैंड पंप पर बाकायदा लिखा गया है कि पानी पीने लायक नहीं है। यही कारण है कि सरकार की तरफ से शहर में विभिन्न जगहों पर आरओ सिस्टम लगाए गए हैं ताकि शहरवासी साफ पीने के पानी को आसानी से हासिल कर सकें। लोगों को यही पानी पीना चाहिए।
स्कूलोंका दौरा कर यूरिन के सैंपल भी लिए जाएंगें
टीमसभी स्कूलों का दौरा करेगी। इस दौरान स्कूली छात्रों के यूरिन के सैंपल लिए जाएंगें ताकि उसकी जांच के बाद फ्लोरोसिस के बारे ने जानकारी हासिल की जा सके। गौर हो कि सेहत विभाग की टीम रुटीन में स्कूल के पानी के सैंपलों की जांच कर रही है। जिस पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक रही है। उन स्कूलों के छात्रों को ग्राउंड वाटर पीने की सलाह दी जाएगी। सभी को आरओ पानी पीने की सलाह भी विभाग की टीम देगी।
यह है फ्लोरोसिस और उसका प्रभाव
पानीमें फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने से लोगों में दांतों में फ्लोरोसिस नामक बीमारी घर कर रही है। सेहत विभाग से हासिल जानकारी अनुसार पानी में फ्लोराइड की मात्रा 1.5 तक होनी चाहिए लेकिन शहर में ज्यादातर कॉलोनियों और गांवों के पानी में यह मात्रा 0.28 से लेकर 7.88 तक है। डॉक्टरों का कहना है कि फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने से सबसे ज्यादा परेशानी छोटी उम्र के बच्चों में होती है। दांतों के माहिर डॉ. बीडी पूरी का कहना है कि बच्चों में 10 साल तक की उम्र में दांत निकलना शुरू होते हैं इससे अगर फ्लोराइड की मात्रा अधिक होगी तो बच्चों के दांतों में पीलापन, दांतों में कालापन, दांतों का कमजोर होना और मसूड़ों में समस्या हो सकती है। यही नहीं इस तरह से अधिक मात्रा में फ्लोराइड बच्चों को हड्डियां कमजोर और कम विकास की बीमारियां भी दे देता है। इसके अलावा इन तत्वों की अधिक मात्रा लोगों को रक्तचाप, किडनी और गुर्दे की बीमारियां भी दे देती है। यहां आने वाले इस बीमारी के मरीजों में ज्यादातर बचपन में ही इस बीमारी का शिकार हो चुके होते हैं।
ग्राउंड लेवल पर होगा काम
^स्कूलीछात्रों में फ्लोरोसिस की जांच की जाएगी। वर्कर ग्राउंड लेबल पर काम करेंगे छात्रों को हेल्थ टिप्स भी दिए जाएंगें। डॉ.तेजवंत सिंह रंधावा,डिप्टी डायरेक्टर कम सिविल सर्जन, बठिंडा।