बठिंडा. बठिंडा-चंडीगढ़फोरलेन प्रोजेक्ट का टेंडर लेने के लिए किसी भी कांट्रेक्टर ने टेंडर ही नहीं भरा। 11 सितंबर को जब लोक निर्माण विभाग ने प्रोजेक्ट का टेंडर ई-टेंडरिंग के जरिए खोला गया, तो पता चला कि पटियाला-जीरकपुर हिस्से के करीब 507 करोड़ के इस प्रोजेक्ट का एक भी टेंडर रिसीव ही नहीं हुआ है। वहीं मिनिस्ट्री ऑफ रोड्स एंड ट्रांसपोर्ट ने अब इस प्रोजेक्ट को बीओटी बेसिस की बजाए ईपीसी (इंजीनियर प्रिक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) बेसिस पर बनाने की मंजूरी दे दी है। इससे अब लोक निर्माण विभाग नए सिरे से इस प्रोजेक्ट को ईपीसी बेसिस पर बनाने का खाका तैयार करेगा और फिर उसे केंद्र को मंजूरी के लिए भेजेगा। इससे इस प्रोजेक्ट का काम और लेट होने की आशंका है।
पहले टेंडर नहीं खुला, अब कोई कांट्रेक्टर नहीं मिला
लोक निर्माण विभाग पहले बठिंडा-चंडीगढ़ फोरलेन प्रोजेक्ट के पटियाला जीरकपुर हिस्से का निर्माण बीओटी (बिल्ड ऑपरेट एंड ट्रांसफर) बेसिस पर करना चाहता था। इसके लिए 3 महीने में 4 बार टेंडर कॉल किए गए, मगर हर बार टेंडर की तारीख आगे बढ़ जाती थी और टेंडर खुल ही नहीं पाया। 11 सितंबर को जब टेंडर खुला तो, उसके लिए किसी कंपनी ने आवेदन ही नहीं किया।
बीअोटीबेसिस पर काम करने को नकार चुकी हैं कंपनियां : प्रोजेक्टको सबसे पहले पूरी तरह बीओटी बेसिस पर बनाया जाना था। इसके लिए 2010 में हैदराबाद और पूणे की दो कंपनियों को 220 किलोमीटर बठिंडा-जीरकपुर हिस्से को दो भागों में बांटकर काम सौंपा था। मगर इन कंपनियों ने कांट्रेक्ट लेने के बाद काम शुरू नहीं किया और कांट्रेक्ट को बीच में ही छोड़ दिया। तब इस प्रोजेक्ट की प्रोजेक्ट लागत 2008 करोड़ रुपये थी। इसके बाद इस प्रोजेक्ट की दोबारा प्लानिंग हुई 220 किलोमीटर हिस्से में से 37 किलोमीटर धनौला, संगरूर और पटियाला बाइपास निकाले गए।
11सितंबर को बठिंडा-चंडीगढ़ फोरलेन हिस्से के पटियाला जीरकपुर 50 किलोमीटर हिस्से का टेंडर खोला था। मगर इसमें किसी कांट्रेक्टर ने रुचि नहीं दिखाई। हमें इस प्रोजेक्ट को ईपीसी बेसिस पर बनाने की मंजूरी मिल गई है।- एनपी सिंह भंडाल, एक्सईएन,लोक निर्माण विभाग