बठिंडा। करीब 200 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले एडवांस कैंसर डाइग्नोस्टिक सेंटर के लिए अभी और इंतजार करना होगा। प्रिंसिपल सेक्रेटरी हेल्थ और मुख्यमंत्री परकाश सिंह बादल ने भले ही इसे चलाने के लिए मार्च 2014 की डेडलाइन दी थी, मगर दिसंबर भी आधा गुजर गया और अभी भी इस अस्पताल के चलने के कोई आसार नजर नहीं रहे। अस्पताल की इमारत ही जो जनवरी 2014 में बाबा फरीद यूनिवर्सिटी को हैंडओवर कर दी जानी थी, अभी तक नहीं हो पाई है। यूनिवर्सिटी के बार-बार विज्ञापन जारी करने के बावजूद पर्याप्त डाक्टर नहीं मिल रहे।
कंपनी को नहीं हुई चार करोड़ की अदायगी
यूनिवर्सिटीके सूत्रों के मुताबिक जब इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली तो यह 60 करोड़ का था, जिसमें 50 बैड के अस्पताल के लिए 28 करोड़ खर्च करने थे, जिसका कांट्रेक्ट केंद्र सरकार की सलाहकार एजेंसी एचएससीसी को सौंपा गया था। कंपनी ने कांट्रेक्ट देकर प्रोजेक्ट पर 2012 में काम शुरू करवा दिया था। इसी बीच इसे 100 बैड का अस्पताल कर दिया और 4 मंजिलें कर दी गई।
इमारत की लागत बढ़कर 39 करोड़ हो गई। कंपनी को अभी तक 35 करोड़ की ही अदायगी हुई है और यह राशि भी कंपनी पटियाला में करवाए जा रहे निर्माण की अदायगी मानकर चल रही है। करीब 20 करोड़ के लेने देने का विवाद है जो अनसुलझा है।
इस साल अगस्त में भर्ती किए गए थे डॉक्टर
सेंटरके लिए डायरेक्टर की नियुक्त कर दी गई है। मगर इसे चलाने के लिए उपयुक्त डाक्टरों की भर्ती प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो पाई। यूनिवर्सिटी ने अगस्त 2014 में एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी के 2 एसोसिएट प्रोफेसर, रेडियोलॉजी के 1 असिस्टेंट प्रोफेसर, 2 मेडिसन के एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर, रेडियोथैरेपी टेक्नालॉजी के एक ट्यूटर, एनेस्थीसिया रेडियोलॉजी के एक प्रोफेसर, 2 जनरल मेडिसन डाक्टर सहित अन्य स्टाफ की भर्ती के लिए विज्ञापन दिया था। इसके बाद नवंबर 2014 में फिर से भर्ती के लिए विज्ञापन दिया।
दो डाक्टरों को भर्ती किया गया, मगर इनमें से एक अस्पताल शुरू होने से पहले ही छोड़ गया। सूत्रों के मुताबिक प्राइवेट सेक्टर में कैंसर विशेषज्ञ डाक्टरों को अच्छा वेतन मिलने से वह रुचि नहीं दिखा रहे।
टीएमसीसे मशीनें आनी अभी बाकी
इमारतके ग्राउंड फ्लोर का जो कुछ हिस्सा तैयार हुआ है वहां पर अभी तक मात्र तीन मशीन ही इंस्टॉल हो पाई है। इसमें कैंसर के इलाज के लिए कोवाल्ट मशीन जो केंद्र से निशुल्क मिली है, एक्सरे और अल्ट्रासाउंड मशीन इंस्टॉल हुई है। जबकि टाटा मैमोरियल कैंसर अस्पताल मुंबई की तरफ से मुहैया करवाई जाने वाली मेमोग्राफी, लीनियर एक्सीलेटर, सिटी स्कैन, एमआरआई, एक्सरे मशीन आदी आनी अभी बाकी हैं।
अफसरों से तलब करेंगे प्रोजेक्ट की प्रोग्रेस रिपोर्ट : हरसिमरत
''एडवांसकैंसर डाइग्नोस्टिक सेंटर के निर्माण कार्य के लेट होने की मुझे सूचना नहीं है। अगर ऐसा है तो इसकी प्रोग्रेस रिपोर्ट संबंधित अफसरों से तलब की जाएगी। हम प्रयास करेंगे कि जल्द इस सेंटर को तैयार कर कैंसर रोगियों को राहत दी जा सके। '' हरसिमरत कौर बादल, केंद्रीयफूड प्रोसेसिंग मंत्री
जल्द शुरू करेंगे एडवांस कैंसर डाइग्नोस्टिक सेंटर की ओपीडी
'' ग्राउंडफ्लोर पर तो कुछ मशीन इंस्टॉल भी हो गई हैं। डाक्टरों की भर्ती भी जल्द हो जाएगी। बहुत जल्द पहले फेज़ में ओपीडी शुरू की जाएगी। इसके बाद एक साल के भीतर पूरा सेंटर एक्टिवेट हो जाएगा। इससे कैंसर रोगियों को सस्ते रेट पर आधुनिक इलाज मिल पाएगा।''- डाॅ.एम.के महाजन, डायरेक्टर,कैसर डाइग्नोस्टिक सेंटर
अस्पताल के लिए पर्याप्त पानी तक नहीं : सेंटर के लिए 167 किलोलीटर पानी प्रतिदिन चाहिए। अभी इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर वाटर वर्क्स से मात्र 10 किलोलीटर प्रतिदिन सप्लाई का ही कनेक्शन मिला है। क्योंकि वाटर वर्क्स की क्षमता मौजूदा समय में 1.5 एमजीडी है। इसमें 5 एमजीडी की भविष्य में बढ़ोतरी करने की योजना है। इसके बाद ही इस अस्पताल को 167 किलोमीटर पानी प्रतिदिन मिल पाएगा। मगर वाटर वर्क्स की क्षमता बढ़ाने का काम 185 करोड़ के प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसका अभी टेंडर ही नहीं हो पाया है।
डॉक्टरों के पद भी नहीं भरे गए अभी, दो डाक्टरों ने किया ज्वाइन, एक छोड़ भी गया।
लेट-लतीफी| एडवांस कैंसर डाइग्नोस्टिक सेंटर के लिए अभी और करना होगा इंतजार।
(बठिंडा में बने रहे एडवांस कैंसर डाइग्नोस्टिक सेंटर की इमारत।)