(श्रीनगर की सड़कों पर अभी भी बाढ़ का पानी भरा है। बच्चे और अन्य समान को बेड़ा में रखकर पानी से गुजरता आदमी।)
जम्मू. पानी उतरने के साथ ही श्रीनगर में लोग बाढ़ से तबाह हुई जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश में जुट गए हैं। पानी उतरा है तो लोग तबाही और बर्बादी का आकलन कर रहे हैं और उससे निपटने की उम्मीदों के सहारो आगे बढ़ रहे हैं। छोटे कारोबारियों का लाखों का सामान बर्बाद हो गया है।
टूरिस्ट सीजन होने के कारण यह मौसम श्रीनगर के लोगों के लिए आमदनी का था, लेकिन बाढ़ से सबकुछ तबाह हो गया है। पर्यटन से होने वाली कमाई अब अगले साल ही संभव है। बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत हुई है। मवेशियों के शव पानी में तैरते दिखाई दे रहे हैं। बीमारी फैलने से बचने के लिए नगर निगम के कर्मचारी मवेशियों के शवों को जमीन में दफना रहे हैं।
श्रीनगर के अंदरूनी इलाकों से निकालने के लिए लगाए गए हैं 30 मोटर पंप
श्रीनगर के अंदरूनी इलाकों से जमा पानी निकालने के लिए 30 मोटर पंप लगाए गए हैं। जवाहर नगर, लाल चौक, बादामी बाग में अभी भी पानी निकालने का काम चालू है। जम्मू-श्रीनगर हाइवे यात्रियों के लिए खुलने से अब कई राज्यों से ट्रकों में भेजी गई राहत सामग्री यहां पहुंचने लगी हैं। श्रीनगर में अब तक हवाई मार्ग से ही राशन तथा अन्य वस्तुएं पहुंचाई जा रही थीं। सड़क मार्ग के खुलने से श्रीनगर से यात्री वाहनों को जम्मू आने की इजाजत होगी। इसके अलावा बारामूला ट्रेन रूट भी खोल दिया गया है।
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