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बैटर रिजल्ट के लिए कंपीटिटिव एग्जाम सिलेबस पर जोर
लवलीएकेडमी की ओर से सिटी स्कूल प्रिंसिपलों की कॉन्फ्रेंस आयोजित करवाई गई जिसका मकसद था कि सिटी स्टूडेंट्स के कंपीटिटिव एग्जाम में रिजल्ट को और बेहतर बनाना। जेईई और एआईपीएमटी की तैयारी कैसे हो और पढ़ने का कैसा पैटर्न डेवलप हो। इसके लिए क्या सिलेबस डेवलप करना चाहिए।
इन सब बातों पर चर्चा करते हुए लवली एकेडमी के डायरेक्टर अमन मित्तल ने प्रिंसिपलों को संबोधित करते कहा, एंट्रेस टेस्ट जेईई और एआईपीएमटी का रिजल्ट शहर और पंजाब दोनों में बहुत ज्यादा उत्साहजनक नहीं रहा। उन्होंने कहा कि लवली एकेडमी और स्कूलों को मिलकर इस दिशा में काम करना चाहिए। सबसे पहला कदम यह उठाना चाहिए कि हम सब मिलकर कंपीटिटिव एग्जाम का एक सिलेबस तैयार करें। ताकि बच्चे भटके कि उन्हें क्या पढ़ना और क्या नहीं। तैयारी कि चक्कर में बच्चे वो भी पढ़ते हैं , जिसकी जरूरत नहीं। ऐसे में स्ट्रेस बढ़ता है। मित्तल ने लवली एकेडमी की अनूठी पहल ‘स्कूल एकीकृत प्रोग्राम’ के बारे मे बताया कि स्कूलों और कंपीटिटिव संस्थानों को मिल कर प्रतियोगी प्रतिस्पर्धाओं का सिलेबस बनाना चाहिए और स्कूल परिसर में ही काबिल टीचर्स की मदद से इसकी तैयारी करवानी चाहिए।
मेयर वर्ल्ड स्कूल के प्रिंसीपल जेएस हुंदल ने कहा, अगर स्टूडेंट किसी कंपीटिटिव एग्जाम में बैठना चाहता है तो 10वीं से ही तैयारी शुरू कर दे। 2 साल की तैयारी स्ट्रेस को कम करेगी और रिजल्ट भी बेहतर होगा।
एक स्पेशल सेशन, प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में आयोजित किया जाना चाहिए। परीक्षाओं के दौरान होने वाले स्टडी स्ट्रेस , स्टडी प्लानिंग होना जैसे विषयों को भी कंपीटिटिव कंपीटिशन का सिलेबस तैयार करते हुए ध्यान में रहना चाहिए। सभी स्कूल के प्रिंसिपलों ने मित्तल के आइडिया कंपीटिटिव एग्जाम के लिए सिलेबस तैयार करने का समर्थन किया। मित्तल ने अंत में कहा कि यह भी सामने आया है कि सिर्फ दसवीं और बारहवीं बोर्ड की होती है। बच्चों में बहुत अच्छे मार्क्स लेने का दबाव रहता है। यह दबाव उनके एग्जाम और रिजल्ट दोनों पर असर डालता है। यानी सबसे पहले हमें बच्चों में दबाव को कम करना है, ताकि वह बिना डिप्रेशन में जाए एग्जाम दें और अच्छा रिजल्ट लाएं। इसके लिए गाइडेंस और काउंसलिंग दोनों की जरूरत है।