पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • डॉक्टर डेथ सर्टिफिकेट में लिखें स्पेसीफिक कारण

डॉक्टर डेथ सर्टिफिकेट में लिखें स्पेसीफिक कारण

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
अगरकिसी की मौत जलने से हुई है तो डाॅक्टर डेथ सर्टिफिकेट पर लिख देते हैं कि मौत सेप्टीसिमिया से हुई है। यह नहीं लिखते कि सेप्टीसिमिया का कारण क्या था। अब फार्म नं 4 में यह भी लिखना होगा कि सेप्टीसिमिया जलने से हुआ था और जलने का कारण स्टोव फटना और अन्य कोई भी एक्सटर्नल कारण लिखना होगा। मान लो किसी की मौत दिल की धड़कन रुकने से हुई है, तो बताना होगा कि वह हुआ कैसे जैसे किसी को फेफड़े का टीबी है। उसकी मौत हेमरेज से हुई है या स्लो डेब्लिटेशन या रेस्पिरेटरी फेलियर से हुई है। इसमें उसकी बीमारी की हिस्ट्री लिखना जरूरी है। ये बातें डायरेक्टरेट आफ सेंसस के सीनियर रिसर्च आफिसर रिटायर्ड जुगल किशोर शर्मा और असिस्टेंट सिविल सर्जन डॉ. देसराज ने डाक्टरों के लिए रखी एक वर्कशाप में बताईं।

सेंसस के असिस्टेंट डायरेक्टर राजिंदर प्रसाद ने बताया कि डेथ सर्टिफिकेट पर सही बीमारी के बारे में लिखने से उस बीमारी के बारे में अधिक जानकारी मिलेगी। जैसे वह किन-किन जगहों पर ज्यादा है, किस उम्र के लोगों में ज्यादा है। ताकि इन बीमारियों की रोकथाम और इलाज बारे सरकार सही रणनीति बना सके। इसलिए डाक्टरों को सिर्फ खाना पूर्ति नहीं करनी है। उन्हें सही बीमारी और उसकी हिस्ट्री के बारे में भी लिखना होगा जिस बीमारी के बारे में नहीं पता उसमें तुक्के लगाते हुए सही से लिखें बीमारी का पता नहीं’। मौके पर डॉ. अल्फ्रेड, डॉ. दविंदर सिंह और जिले भर से ईएमओ भी मौजूद रहे।

सिविल में वर्कशॉप में जुगल किशाेर ने डॉक्टरों को स्पष्ट कारण लिखने को कहा।